संभल में हजरत शाह अली मुत्तकी का उर्स:तीसरे दिन चादरपोशी, देश की खुशहाली की दुआ मांगी गई
संभल के अली सराय स्थित दरगाह हजरत शाह अली मुत्तकी इसराईली चिश्ती कादरी रहमतुल्लाह अलैह के चार दिवसीय सालाना उर्स मुबारक के तीसरे दिन बुधवार को चादरपोशी की रस्म अदा की गई। इस दौरान दरगाह परिसर में बड़ी संख्या में अकीदतमंद उमड़े, जिससे पूरा माहौल सूफियाना रंग में रंग गया। कार्यक्रम की शुरुआत महफिल-ए-समा से हुई, जहां सूफी कलाम और नात-मनकबत पेश किए गए। इस दौरान हजरत शाह अली मुत्तकी की शिक्षाओं और सेवाओं को याद किया गया। महफिल में मौजूद जायरीन और अकीदतमंदों ने श्रद्धाभाव के साथ सूफियाना कलाम सुने। इसके बाद दरगाह शरीफ पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ चादरपोशी की गई। इस अवसर पर देश की तरक्की, अमन-चैन, आपसी भाईचारे और विश्व शांति के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं। इस अवसर पर सईद अख्तर ने सूफी संतों की शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सूफी संतों की शिक्षाएं प्रेम, इंसानियत, सहिष्णुता और भाईचारे का संदेश देती हैं। हजरत शाह अली मुत्तकी रहमतुल्लाह अलैह ने अपने जीवन के माध्यम से समाज को एकता और मानवता की राह दिखाई। अख्तर ने जोर देकर कहा कि आज के समय में उनकी शिक्षाओं को अपनाने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। उन्होंने बताया कि उर्स केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में प्रेम और सद्भाव को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। उर्स में संभल सहित आसपास के जिलों और विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचे। उन्होंने दरगाह पर हाजिरी देकर अपनी मुरादों के लिए दुआएं कीं। दरगाह परिसर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए थे। श्रद्धालुओं ने मजार शरीफ पर फूल और चादरें पेश कर अपनी अकीदत का इजहार किया। देर शाम तक दरगाह परिसर में धार्मिक गतिविधियां जारी रहीं। आयोजकों के अनुसार, उर्स के अंतिम दिन भी विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के शामिल होने की उम्मीद है। यह उर्स मुबारक क्षेत्र में धार्मिक सौहार्द, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश दे रहा है।
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