बबीता उर्फ खदीजा से आतंकी-नेटवर्क से जुड़े कई सुराग मिले:आत्मघाती हमले की कथित ट्रेनिंग से लेकर हनीट्रैप-एंगल तक जांच, युवतियों को नेटवर्क से जोड़ने की कोशिशों की पड़ताल

बबीता उर्फ खदीजा से आतंकी-नेटवर्क से जुड़े कई सुराग मिले:आत्मघाती हमले की कथित ट्रेनिंग से लेकर हनीट्रैप-एंगल तक जांच, युवतियों को नेटवर्क से जोड़ने की कोशिशों की पड़ताल




जयपुर से गिरफ्तार जैश-ए-मोहम्मद की कथित महिला स्लीपर सेल सदस्य बबीता धाकड़ उर्फ खदीजा को एटीएस ने सात दिन की रिमांड पर लिया है। रिमांड के दौरान पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, बबीता पिछले करीब दो वर्षों से आतंकी संगठन के संपर्क में थी और उसे आत्मघाती हमले के लिए तैयार किए जाने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलर्स उसे ऑनलाइन प्रशिक्षण दे रहे थे। जांच में यह भी सामने आया है कि उसने इंटरनेट पर आत्मघाती हमलों से जुड़े विषयों की जानकारी खोजी थी। एजेंसियां उसके डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन गतिविधियों की गहन जांच कर रही हैं। भारतीय सेना के जवानों को हनीट्रैप में फंसाने की ट्रेनिंग प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि उसे सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय सेना के जवानों को हनीट्रैप में फंसाने और उनसे संपर्क स्थापित करने की ट्रेनिंग दी गई थी। बताया जा रहा है कि उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए कई लोगों से संपर्क साधने का प्रयास किया था। युवतियों का ब्रेनवॉश कर उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित करने का प्रयास जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि बबीता अन्य राज्यों के कई लोगों के संपर्क में थी और कुछ युवतियों को प्रभावित कर उन्हें संगठन से जोड़ने की कोशिश कर रही थी। आरोप है कि सोशल मीडिया के जरिए वह युवतियों का ब्रेनवॉश कर उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रही थी। क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की योजना सूत्रों के अनुसार, उसका संपर्क जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े कुछ पाकिस्तान स्थित व्यक्तियों से भी था और वह उनसे व्हाट्सएप के जरिए बातचीत करती थी। जांच में यह भी सामने आया है कि उसे क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की योजना थी। पूछताछ के दौरान धर्म परिवर्तन से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। एजेंसियों के अनुसार, धर्म परिवर्तन के बाद उसने अपना नाम खदीजा रखा था। उसके मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। बताया जा रहा है कि वह तीन मोबाइल नंबरों का उपयोग करती थी और व्हाट्सएप चैट, फोटो तथा वीडियो नियमित रूप से डिलीट कर देती थी। जांच एजेंसियां अब उसके संपर्कों, डिजिटल नेटवर्क, संभावित फंडिंग और कथित आतंकी कनेक्शन की पड़ताल में जुटी हैं। एटीएस का मानना है कि पूछताछ से आने वाले दिनों में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। मामले की जांच अभी जारी है। पूछताछ में सामने आई जानकारियां जांच एजेंसियों के सूत्रों पर आधारित हैं और आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।



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