Rajasthan Health Minister Gajendra Singh Khimsar Vows Medical Dept Revamp

Rajasthan Health Minister Gajendra Singh Khimsar Vows Medical Dept Revamp


राजस्थान में हाल ही में कोटा, बीकानेर में प्रसूताओं की मौत और जोधपुर में तबीयत बिगड़ने के मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार सवालों के घेरे में है। विपक्ष ने इसे चिकित्सा व्यवस्था की कमी बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है। वहीं चिकित्सा मंत्री गजेंद

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उनका कहना है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए लगातार बड़े स्तर पर सुधार किए जा रहे हैं। चिकित्सा विभाग सबसे ज्यादा चैलेंजिंग है। दो साल के अंदर कायापलट कर दूंगा।

इन घटनाओं के बाद चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर से खास बातचीत की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…

सवाल : कोटा, बीकानेर में एक के बाद एक प्रसूता की मौत के मामले सामने आए, विपक्ष आपके विभाग पर सवाल उठा रहा है, कहां लापरवाही बरती गई?

जवाब : ये सभी अलग-अलग नेचर के केस हैं। मैं आपको एक ही बात कहना चाहूंगा कि स्वास्थ्य विभाग में किसी भी तरह का मरीज आए, चाहे वह कितनी भी गंभीर स्थिति में हो, विभाग हमेशा उसके इलाज के लिए तैयार रहता है। हमारे पास बहुत ज्यादा रेफरल केस आते हैं, कई बार बेहद खराब स्थिति में मरीज पहुंचते हैं।

चिकित्सा मंत्री ने दावा किया कि सरकारी अस्पतालों में मरीज बेहद गंभीर हालत में पहुंचते हैं।

राजस्थान के अभी के आंकड़ों के अनुसार- करीब एक लाख डिलीवरी पर सिर्फ 48 डेथ हैं। इसमें सिजेरियन और नॉर्मल, दोनों तरह की डिलीवरी शामिल हैं। आप खुद समझ सकते हैं कि इतने बड़े स्तर पर काम हो रहा है। हमारे डॉक्टर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। खराब स्थिति में जो मरीज आते हैं, उन्हें भी संभालने का पूरा प्रयास किया जाता है। इतने बड़े स्केल पर, जहां प्रदेश में करीब 23 हजार अस्पतालों के माध्यम से इतनी बड़ी आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं, वहां हमारा विभाग कभी भी पीछे नहीं हटता।

मुख्यमंत्री जी ने चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 37 हजार करोड़ रुपए का बजट दिया है। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कितनी गंभीर है। हमें सकारात्मक दिशा में देखना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए।

सवाल : कोटा मामले में कमी कहां रही और उसे किस तरह सुधारा जाएगा?

जवाब : कोटा में जो इश्यूज थे, उन्हें हमने प्रेस के सामने भी हाईलाइट किया है। कुछ छोटे-मोटे एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) से जुड़े मामले थे, जिनमें सुधार की जरूरत थी। उन सभी को दुरुस्त किया जा रहा है और जल्द ही उन्हें सही कर लिया जाएगा।

गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा- अगले 2 साल में चिकित्सा विभाग का कायापलट करेंगे।

सवाल : विपक्ष का आरोप है कि रेफरल व्यवस्था कमजोर है। उनका कहना है कि अगर कोटा वाला मामला बाकी मामलों से अलग है तो फिर वहां की असल स्थिति और कमी को स्पष्ट किया जाना चाहिए?

जवाब : अगर आप कांग्रेस के कार्यकाल के आंकड़े देखेंगे तो चौंक जाएंगे। चिकित्सा विभाग की स्थिति उस समय बेहद कमजोर थी। मरीजों की देखभाल से जुड़ी व्यवस्थाओं में भी कई कमियां थीं। हमारी सरकार आने के बाद ढाई साल के अंदर चिकित्सा विभाग में बड़े स्तर पर काम हुआ है। हमने सभी पदों को भरने की दिशा में काम किया है, जिसमें नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की नियुक्तियां शामिल हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री जी लगातार नए अस्पताल खोल रहे हैं।

सवाल : पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने हाल ही में कहा कि गजेंद्र सिंह खींवसर पिछले कार्यकाल में अच्छे मंत्री रहे हैं, लेकिन इस बार शायद आपके ग्रह-नक्षत्र खराब हैं।

जवाब : देखिए, ग्रह-नक्षत्र की बात नहीं है। मेरे पास पहले ऊर्जा और इंडस्ट्री विभाग था, लेकिन चिकित्सा विभाग एक बहुत ही अलग और चुनौतीपूर्ण विभाग है। इसमें सीधे तौर पर जीवन और मृत्यु का मामला जुड़ा होता है। मैं कहता हूं कि सभी विभागों में अगर सबसे ज्यादा चैलेंजिंग कोई विभाग है तो वह चिकित्सा विभाग है। यह बहुत संवेदनशील विभाग है और इसमें हर समय जिम्मेदारी रहती है। मैं पूरी कोशिश कर रहा हूं कि अगले डेढ़ से दो साल के अंदर इस विभाग को पूरी तरह बदलकर एक अच्छी लाइन पर लेकर आ सकूं।

सवाल : लगातार यह सवाल उठ रहे हैं कि जब SMS अस्पताल में आग लगी थी तो आप बहुत लेट पहुंचे। इसी तरह कोटा मामले में भी आपके पहुंचने में देरी हुई?

जवाब : SMS अस्पताल के मामले में मैं तुरंत पहुंच गया था। वहीं कोटा हादसे के समय मैं खुद अस्पताल में भर्ती था। मेरा प्रोस्टेट का छोटा सा ऑपरेशन हुआ था और मैं तब दिल्ली के अस्पताल में भर्ती था। जैसे ही मेरी तबीयत ठीक हुई, मैं तुरंत रवाना हुआ। उस समय मैं खुद एक मरीज की स्थिति में था और माइनर सर्जरी के बाद रिकवरी कर रहा था, इसलिए तुरंत पहुंच पाना संभव नहीं था। इसी वजह से दो-तीन दिन का विलंब हुआ। इसके बाद मैं वहां पहुंचा और स्थिति को संभाला।

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चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा-कोटा और बीकानेर में प्रसूताओं की मौत के मामले का आपस में कोई संबंध नहीं है। राजस्थान में फिलहाल प्रति 1 लाख प्रसव (डिलीवरी) पर करीब 48 प्रसूताओं की मौत होती है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय मानकों से कहीं ज्यादा बेहतर है। (पूरी खबर पढ़ें)



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