हाईकोर्ट की आईआईटी रोपड़ को फटकार:दोबारा दाखिला देने के आदेश, शिकायत के अगले दिन इस्तीफा मंजूर, PHD शोधार्थी को राहत

हाईकोर्ट की आईआईटी रोपड़ को फटकार:दोबारा दाखिला देने के आदेश, शिकायत के अगले दिन इस्तीफा मंजूर, PHD शोधार्थी को राहत




उत्पीड़न की शिकायत करने के अगले ही दिन पीएचडी छात्रा का इस्तीफा मंजूर करने पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आईआईटी रोपड़ को फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने छात्रा का इस्तीफा रद्द करते हुए उसे दोबारा पीएचडी कार्यक्रम में शामिल करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से साफ है कि छात्रा ने अपनी मर्जी से इस्तीफा नहीं दिया था। उसने लगातार उत्पीड़न और खराब माहौल से परेशान होकर मजबूरी में इस्तीफा दिया था। यह आदेश जस्टिस कुलदीप तिवारी ने फातिमा मकसूद की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। छात्रा ने 22 नवंबर 2025 को स्वीकार किए गए अपने इस्तीफे को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। शिकायत के अगले दिन मंजूर इस्तीफा याचिका में बताया गया कि 21 नवंबर 2025 को छात्रा ने आईआईटी रोपड़ के निदेशक को ई-मेल भेजकर रसायन विभाग के कुछ फैकल्टी सदस्यों पर उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे। उसने शिकायत में संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की थी। छात्रा का कहना था कि लगातार मानसिक प्रताड़ना और अनुचित व्यवहार के कारण उसकी हालत इतनी खराब हो गई थी कि उसे इलाज के लिए पीजीआई तक जाना पड़ा। उसने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम का उसके 67 वर्षीय पिता पर भी मानसिक असर पड़ा। बिना जांच किए इस्तीफा मंजूर किया सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि शिकायत मिलने के बाद संस्थान ने आरोपों की जांच करने या उनका समाधान निकालने के बजाय अगले ही दिन छात्रा के इस्तीफे की सिफारिश, मंजूरी और स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया पूरी कर दी। अदालत ने कहा कि इस्तीफे में भी छात्रा ने साफ लिखा था कि वह लगातार हो रहे दुर्व्यवहार और उत्पीड़न के कारण पद छोड़ने के लिए मजबूर है। ऐसे में इसे स्वैच्छिक इस्तीफा नहीं माना जा सकता। सुनवाई के दौरान आईआईटी रोपड़ ने दलील दी कि छात्रा पहले भी कई फैकल्टी सदस्यों और अन्य छात्रों के खिलाफ शिकायतें करती रही है। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले का मुख्य मुद्दा यह है कि उत्पीड़न की शिकायत मिलने के बाद संस्थान ने उसकी निष्पक्ष जांच करने के बजाय जल्दबाजी में इस्तीफा स्वीकार कर लिया। अदालत ने यह भी कहा कि छात्रा के खिलाफ कभी कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई और न ही उसे कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। समाधान की बजाय छुटकारा पाने की जल्दी हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि संस्थान की कार्रवाई से ऐसा प्रतीत होता है कि वह छात्रा की समस्या का समाधान करने के बजाय उससे छुटकारा पाने की जल्दी में था। अदालत ने माना कि इस्तीफे की भाषा से स्पष्ट है कि यह किसी स्वतंत्र इच्छा से लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि परिस्थितियों से मजबूर होकर उठाया गया कदम था। हाईकोर्ट ने 22 नवंबर 2025 को इस्तीफा स्वीकार करने का आदेश रद्द करते हुए आईआईटी रोपड़ को निर्देश दिया कि छात्रा को पीएचडी (रसायन विज्ञान) कार्यक्रम में दोबारा दाखिला दिया जाए और उसकी पढ़ाई बिना किसी बाधा के जारी रखने की व्यवस्था की जाए। साथ ही अदालत ने छात्रा को भी अपने हलफनामे के अनुसार पढ़ाई पर ध्यान देने और भविष्य में संस्थान के भीतर अनावश्यक शिकायतें नहीं करने की सलाह दी। फैसले के अंत में हाईकोर्ट ने आईआईटी रोपड़ के निदेशक से कहा कि वह ऐसा माहौल बनाएं, जहां छात्रा बिना किसी डर और दबाव के अपनी पीएचडी की पढ़ाई और शोध का काम पूरा कर सके।



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