फर्जी फास्टैग लगाकर टोल पार करने वाले दो गिरफ्तार:टैक्स और ओवरलोड चालान से बचते थे दो भाई, फायदे पाना के लिए कर रहे थे फर्जीवाड़ा
लखनऊ में फर्जी फास्टैग के जरिए टोल टैक्स, ओवरलोड शुल्क और ऑनलाइन चालान से बचने वाले दो सगे भाइयों को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। दोनों के खिलाफ सरोजनीनगर थाने में दर्ज मुकदमे की विवेचना एसटीएफ कर रही थी। पूछताछ में आरोपियों ने अधिक आर्थिक लाभ के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फास्टैग बनवाकर उसका इस्तेमाल करने की बात स्वीकार की। एसटीएफ के अनुसार, एआरटीओ लखनऊ दक्षिणी की शिकायत पर सरोजनीनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की विवेचना निरीक्षक प्रमोद कुमार वर्मा कर रहे थे। जांच में सामने आया कि गारी नंबर UP 32 ZN 8925 के मालिक रियाज और उसके भाई सिराज साल 2024 से अपने वाहन पर कूटरचित फास्टैग का इस्तेमाल कर रहे थे। फास्टैग में फर्जी गाड़ी संख्या MA 34 59455 दर्ज थी। बाद में एक अन्य वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उसी फर्जी फास्टैग का इस्तेमाल साल 2025 से वाहन UP 32 ZN 8925 पर किया जाने लगा। एसटीएफ की जांच में पता चला कि सिराज ने अपने परिचितों के माध्यम से सीतापुर के खैराबाद टोल प्लाजा के पास स्थित एक फास्टैग एजेंट को ड्राइविंग लाइसेंस, मोबाइल नंबर और कूटरचित आरसी उपलब्ध कराकर फर्जी वाहन संख्या के आधार पर इंडसइंड बैंक का फास्टैग जारी कराया था। पूछताछ के लिए एसटीएफ मुख्यालय गोमतीनगर बुलाए गए रियाज पुत्र सगीर और सिराज पुत्र सगीर निवासी पटकी टोला, वार्ड मीरा टोला लहरपुर सीतापुर ने स्वीकार किया। उन्होंने बताया अधिक आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से उन्होंने फर्जी फास्टैग का इस्तेमाल किया। इसका मकसद उत्तर प्रदेश के विभिन्न टोल प्लाजा पर ओवरलोड शुल्क और ऑनलाइन चालान से बचना था। पूछताछ में अपराध में संलिप्तता पाए जाने के बाद एसटीएफ ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया।
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