Rajasthan Election Commission & Govt Delaying Panchayat, Urban Body Polls: Sanyam Lodha
प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंच गया हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी परिसीमन और चुनाव प्रक्रिया को समय पर पूरा नहीं करने पर राज्य चुनाव आयोग और सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई है।
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पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने अवमानना याचिका में कहा कि हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा था कि शहरी निकायों का वार्ड परिसीमन और मतदाता सूची का संशोधन 20 जून 2026 तक पूरा किया जाए और सम्पूर्ण चुनाव प्रक्रिया 31 जुलाई 2026 तक पूरी कर ली जाए।
इसके बावजूद अभी तक चुनाव प्रक्रिया आरंभ नहीं की गई है। याचिका में राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह, सचिव राजेश वर्मा, पंचायती राज आयुक्त डॉ. जोगाराम, और स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक प्रतीक चंद्रशेखर जुईकर को पक्षकार बनाया गया है।
कोर्ट से मांग की गई है कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करके उन्हें दंडित किया जाए और उन्हें 31 जुलाई तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिए जाए। हाईकोर्ट आगामी दिनों में अवमानना याचिका पर सुनवाई करेगा।
पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने अवमानना याचिका दायर की हैं
अधिकारी ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे याचिका में कहा गया कि विभिन्न विभागों के बीच हुए पत्राचार में अधिकारी अभी भी राजस्थान पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट का इंतजार करने पर अड़े हुए हैं, जबकि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा था कि आयोग की रिपोर्ट का इंतजार नहीं किया जाए और चुनावों को किसी भी आधार पर आगे नहीं टाला जाए।
हाईकोर्ट का आदेश सभी अधिकारियों पर बाध्यकारी था, लेकिन अधिकारियों ने अपनी उदासीनता और गैर-जिम्मेदार रवैये से अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना की है। हमने 1 जुलाई को संबंधित अफसरों को अवमानना का कानूनी नोटिस भी दिया था, लेकिन उसका भी कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला हैं।
कोर्ट ने दिए थे 31 जुलाई तक चुनाव कराने के आदेश राजस्थान हाईकोर्ट ने पहले आयोग और सरकार को 15 अप्रेल तक प्रदेश में निकाय और पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकार और आयोग ने अदालत में प्रार्थना पत्र लगाकर चुनाव टालने की अपील की थी।
प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने समय देते हुए 31 जुलाई तक हर हाल में चुनाव कराने के लिए कहा था। वहीं ओबीसी आयोग को भी 20 जून तक अपनी रिपोर्ट देने के लिए बोला था।

