Indian Navy Warship; INS Mahendragiri Commissioned Update
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विशाखापत्तनम43 मिनट पहले
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INS महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट-17A के तहत बनने वाले नीलगिरि कैटेगरी के स्टेल्थ फ्रिगेट का छठा युद्धपोत है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम नेवल डॉकयार्ड में INS महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना में शामिल (कमीशन) किया। महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट-17A की नीलगिरि कैटेगरी का छठा स्टेल्थ फ्रिगेट (युद्धपोत) है। इसे बनाने में 75% से ज्यादा स्वदेशी उपकरण और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
INS महेंद्रगिरि स्वदेशी अत्याधुनिक हथियारों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से लैस है। यह हवाई हमलों, दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों से एक साथ मुकाबला करने में सक्षम है। यह हिंद महासागर में भारत की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करेगा।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आंध्र प्रदेश के कुरनूल में आठ ड्रोन कंपनियों के समूह के साथ ‘ड्रोन सिटी’ विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह सूरत ‘डायमंड सिटी’ और बेंगलुरु ‘सिलिकॉन वैली’ के नाम से जाना जाता है, उसी तरह आने वाले समय में कुरनूल देश का ड्रोन हब बनेगा।
INS महेंद्रगिरि की तस्वीरें…
यह मल्टी-मिशन स्टेल्थ फ्रिगेट एक साथ हवा, समुद्र की सतह और समुद्र के भीतर मौजूद खतरों का सामना कर सकता है।
नौसेना के मुताबिक, INS महेंद्रगिरि इंडो-पैसिफिक रीजन को सुरक्षित और स्थिर बनाने में भूमिका निभाएगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापट्टनम नेवल डॉकयार्ड में INS महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना में शामिल किया।
INS महेंद्रगिरि की खासियत
- 75% से ज्यादा स्वदेशी तकनीक: इसे भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है और मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने तैयार किया है। युद्धपोत में 75% से ज्यादा स्वदेशी उपकरण और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके निर्माण में देशभर की कई MSME कंपनियों ने भी योगदान दिया है, जिससे रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
- मॉडर्न हथियारों से लैस: महेंद्रगिरि में आधुनिक सरफेस-टू-सरफेस और सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर सिस्टम और इंटीग्रेटेड कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाए गए हैं।
- स्टेल्थ तकनीक और हाई-स्पीड क्षमता: महेंद्रगिरि में उन्नत स्टेल्थ तकनीक दी गई है, जिससे इसकी रडार पर पहचान करना मुश्किल होगा। इसमें कम्बाइंड डीजल और गैस (CODOG) प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है, जो इसे लंबी दूरी तक तेज गति से संचालन की क्षमता देता है।
अब जानिए प्रोजेक्ट 17A के बारे में…
प्रोजेक्ट-17A (Project 17A) के तहत भारतीय नौसेना के लिए कुल 7 स्टेल्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। इनमें से 4 युद्धपोत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स मुंबई बना रहा है। 3 युद्धपोत गार्डन रीच शिप बिल्डर्स कोलकाता बना रहा है।
प्रोजेक्ट-17A, प्रोजेक्ट-17 (शिवालिक क्लास) का एडवांस्ड वर्जन है। इसमें पहली बार भारत में बड़े युद्धपोतों के निर्माण में इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन (ब्लॉक निर्माण) तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। इसमें जहाज के अलग-अलग हिस्से पहले तैयार किए जाते हैं और बाद में उन्हें जोड़कर पूरा युद्धपोत बनाया जाता है। इससे निर्माण का समय कम होता है और गुणवत्ता बेहतर रहती है।
भास्कर नॉलेज: पर्वतों-नदियों के नाम पर युद्धपोतों के नाम रखे
INS महेंद्रगिरि का नाम जिस महेंद्रगिरि पर्वत पर रखा गया है, उसका धार्मिक महत्व भी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह पर्वत भगवान परशुराम की तपस्थली थी। रामायण में भी इसका उल्लेख मिलता है। भारतीय नौसेना अपनी कई युद्धपोतों के नाम देश के ऐतिहासिक पर्वतों, नदियों और विरासत से जुड़े स्थलों पर रखती है, जिससे सैन्य परंपरा और सांस्कृतिक पहचान दोनों को सम्मान मिलता है।
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