बेमेतरा में रिमझिम बारिश के बीच कमरछठ की पूजा:संतान की लंबी उम्र के लिए माताओं ने रखा व्रत, पसहर चावल और 6 भाजियों से की पूजा
बेमेतरा जिले में बुधवार को कमरछठ यानी हलषष्ठी पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर माताओं ने व्रत रखा और हलषष्ठी माता की विधि-विधान से पूजा की। मौसम बदला रहा और रिमझिम बारिश होती रही, लेकिन महिलाओं का उत्साह कम नहीं हुआ। जगह-जगह जुटीं महिलाएं, सुनी कथा शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक महिलाएं समूह में एकत्रित हुईं। कई माताओं ने निर्जला व्रत रखा और सामूहिक पूजा के बाद हलषष्ठी माता की कथा सुनी। ग्रामीण क्षेत्रों में पूजा के दौरान छत्तीसगढ़ की पारंपरिक रीति-रिवाजों और लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। पसहर चावल और 6 भाजियों से पूजा कमरछठ की पूजा में पारंपरिक सामग्री का विशेष महत्व रहा। महिलाओं ने पसहर चावल, 6 तरह की भाजियां, महुआ और फल चढ़ाए। इसके साथ ही भैंस के दूध, दही और घी का भी पूजा में इस्तेमाल किया गया। मान्यता के अनुसार, इस पर्व पर माताएं अपनी संतान के सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करती हैं। 25 साल से रख रहीं कमरछठ का व्रत बेमेतरा निवासी रेखा वर्मा ने बताया कि वह करीब 25 साल से कमरछठ का व्रत रख रही हैं। उनके मुताबिक, संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए महिलाएं यह व्रत रखती हैं। हलषष्ठी माता की पूजा से मन को शांति और संतोष मिलता है। नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ता है पर्व कमरछठ धार्मिक आस्था के साथ मां और संतान के रिश्ते की ममता और प्रेम का प्रतीक भी है। बदलते समय में पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच ऐसे पर्व नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं।
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