सिरसा में युवक की मौत पर अस्पताल के बाहर हंगामा:परिजनों ने गेट पर पत्थर फेंके; बोले- समय पर नहीं किया इलाज, इकलौता बेटा था
सिरसा में एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन के करीब 6 दिन बाद युवक की तबीयत बिगड़ गई। परिजनों का आरोप है कि उसे पहले इसी अस्पताल में लाया गया, जहां से हालत गंभीर बताकर दूसरे निजी अस्पताल के लिए रेफर किया गया। वहां से युवक को बठिंडा रेफर किया गया। बठिंडा पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की मौत से गुस्साए परिजनों ने शनिवार शाम सिरसा के निजी अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान कुछ लोगों ने अस्पताल के गेट पर पत्थर भी फेंके। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति संभाली। मृतक की पहचान जेजे कॉलोनी निवासी विक्की (27) के रूप में हुई है। जानें, क्या था पूरा मामला… जानकारी के अनुसार, मृतक विक्की शहर की जेजे कॉलोनी का रहने वाला था। उसे पत्थरी की शिकायत थी। परिजनों ने 6 दिन पहले उसका ऑपरेशन शहर के डीएमसी अस्पताल में करवाया था। ऑपरेशन के बाद युवक को घर ले जाया गया। आज 6 दिन बाद उसकी तबीयत दोबारा बिगड़ गई। इसके बाद परिजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टर ने उसकी हालत गंभीर बताई और उसे दूसरे निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। परिजनों का कहना है कि वहां भी युवक को समय पर इलाज नहीं मिला और उसे बठिंडा रेफर कर दिया गया। बठिंडा पहुंचने पर डॉक्टरों ने विक्की को मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप विक्की की मौत के बाद परिजन वापस सिरसा के निजी अस्पताल पहुंचे और प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि मरीज को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर किया जाता रहा, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिला। परिजनों ने डॉक्टरों पर आपसी मिलीभगत का आरोप भी लगाया। परिजनों के अनुसार, मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया और काफी देर तक पंप किया जाता रहा। उनका आरोप है कि उन्हें करीब 24 घंटे तक अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर लगवाए गए। इसी बात को लेकर गुस्साए लोगों ने अस्पताल के गेट पर पत्थरबाजी की। पांच के बेटे का पिता था विक्की परिजनों ने बताया कि विक्की शादीशुदा था और हेयर ड्रेसर था। उसका पांच माह का बेटा है। वह परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी मौत के बाद मां और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों का कहना है कि वे शनिवार सुबह से दोपहर तक अस्पताल में इलाज के लिए चक्कर लगाते रहे। अब जानें सर्जन ने क्या कहा… अस्पताल के सर्जन डॉ. अनुज ने बताया कि युवक उनके पुराने परिचित परिवार से था और उसके पिता का भी पहले ऑपरेशन हो चुका है। डॉक्टर के अनुसार, युवक को काला पीलिया की शिकायत थी। परिवार ने उसके नशे की आदत के बारे में भी बताया था। डॉ. अनुज ने कहा कि परिजन युवक का ऑपरेशन करवाने पर अड़े थे। उनकी सहमति के बाद ऑपरेशन किया गया। उन्होंने माना कि परिजनों से लिखित सहमति नहीं लेना उनकी गलती थी। ऑपरेशन के बाद युवक घर चला गया था और 6 दिन बाद तबीयत बिगड़ने पर दोबारा अस्पताल लाया गया। डॉक्टर के अनुसार, उस समय युवक की हालत नाजुक थी। दूसरे अस्पताल के डॉक्टर से बात करने के बाद एंबुलेंस से उसे रेफर किया गया। उन्होंने परिजनों के इस आरोप को गलत बताया कि मरीज कई घंटे पहले ही मृत था। डॉक्टर ने कहा कि जांच और उपचार की प्रक्रिया कैमरों की निगरानी में हुई थी। उन्होंने अस्पताल पर पत्थरबाजी को गलत बताया। पुलिस के पहुंचने के बाद प्रदर्शन शांत हुआ। इसके बाद दोनों पक्षों में बातचीत हुई और परिजन वहां से चले गए।
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