5 महीने की मेहनत से बन रहीं दुर्गा प्रतिमाएं:पश्चिम बंगाल के कलाकार कर रहे तैयार, 80 हजार तक की मिली बुकिंग
बस्ती में शारदीय नवरात्रि का 11 अक्टूबर को आगमन हो रहा है, बस्ती में दुर्गा पूजा की तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम चल रहा है। खास बात यह है कि प्रतिमाएं तैयार करने के लिए पश्चिम बंगाल के कलाकार करीब पांच महीने पहले ही बस्ती पहुंच गए थे। अब उनकी मेहनत रंग लाने लगी है और प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सिविल लाइंस स्थित प्रतिमा निर्माता अमोल पाल करीब 27 वर्षों से बस्ती में मां दुर्गा की प्रतिमाएं बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी वह पांच महीने पहले ही यहां आ गए थे। इसके बाद से लगातार प्रतिमाएं तैयार करने में जुटे हैं। उनके यहां सबसे महंगी प्रतिमा की बुकिंग 80 हजार रुपये में हुई है, जिसे सिद्धार्थनगर जिले में स्थापित किया जाएगा। वहीं, सबसे कम कीमत की प्रतिमाएं चार से पांच हजार रुपये तक में उपलब्ध हैं। दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन होता है ग्रामीण क्षेत्रों में नवरात्रि के पहले दिन से ही दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना शुरू हो जाती है। शहर में भी कई स्थानों पर पहले दिन मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इसके लिए पूजा समितियां पंडालों को सजाने और अन्य तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। पूर्णिमा पर विसर्जन देखने उमड़ती है भीड़ बस्ती की दुर्गा पूजा अपनी भव्यता और विशिष्ट परंपरा के लिए प्रदेश में अलग पहचान रखती है। जहां अधिकांश स्थानों पर दशहरे के दिन दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है, वहीं बस्ती में पूर्णिमा के दिन विसर्जन की परंपरा है। इसी वजह से विसर्जन के दिन आसपास के जिलों और ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग शहर पहुंचते हैं। मां दुर्गा की प्रतिमाओं के दर्शन और विसर्जन का नजारा देखने के लिए शहर में भारी भीड़ जुटती है। नवरात्रि से लेकर विसर्जन तक बस्ती में भक्ति और उत्सव का माहौल बना रहता है।
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