संत को 'सिर तन से जुदा' की धमकी, हाईकोर्ट सख्त:तीन की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने चार्जशीट पेश नहीं की, केस डायरी तलब




संत दिगंबर अखाड़े के जगद्गुरु स्वामी राघव देवाचार्य को सोशल मीडिया पर ‘सिर तन से जुदा’ करने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। स्वामी की ओर से दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने केस डायरी तलब की है। अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को तय की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद मामले में आगे प्रभावी कार्रवाई नहीं की। एक साल से अधिक समय बीतने के बावजूद आरोपपत्र भी पेश नहीं किया गया है। अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि स्वामी राघव देवाचार्य ने धमकी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस को शिकायतें दी थीं। उनके अनुसार, पुलिस को 41 पेज के व्हाट्सऐप स्क्रीनशॉट भी उपलब्ध कराए गए, लेकिन शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। एसपी, आईजी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। बूढ़ी माता पर टिप्पणी के विरोध के बाद मिली थी धमकी मामले की शुरुआत अप्रैल 2025 में हुई थी। जानकारी के मुताबिक, 8 अप्रैल को हनुमानताल निवासी अब्दुल मजीद ने बूढ़ी माता को लेकर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी का शहर में विरोध हुआ। स्वामी राघव देवाचार्य ने भी हिंदू धर्म और भगवान के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद 13 अप्रैल को स्वामी राघव देवाचार्य को सोशल मीडिया पर ‘सिर तन से जुदा’ करने और जान से मारने की धमकी मिलने की बात सामने आई। स्वामी का कहना है कि उन्हें ये धमकियां धर्म और भगवान के खिलाफ की गई टिप्पणियों का विरोध करने के बाद मिली थीं। इस मामले को लेकर हिंदू संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन किया था। तीन आरोपियों की गिरफ्तारी, आगे कार्रवाई नहीं होने का आरोप प्रारंभिक मामले में पुलिस ने 11 अप्रैल को अब्दुल मजीद सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया था और अब्दुल मजीद के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई शुरू की थी। वहीं, धमकी के मामले में स्वामी की ओर से 30 से अधिक लोगों के नाम पुलिस को दिए जाने की बात कही गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने केवल तीन लोगों की गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित रखी। अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच, आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई और आरोपपत्र दाखिल करने में देरी पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से आशंका जताई गई कि कार्रवाई में देरी से समर्थकों में नाराजगी बनी हुई है और स्थिति बिगड़ने का खतरा हो सकता है। कोर्ट ने पुलिस से कार्रवाई का ब्योरा मांगा स्वामी राघव देवाचार्य की याचिका पर शुक्रवार को जस्टिस हिमांशु जोशी की अदालत में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पुलिस की कार्रवाई और जांच में देरी का मुद्दा उठाया गया। अदालत ने सरकारी वकील से निर्देश प्राप्त करने को कहा और केस डायरी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि अब तक हुई कार्रवाई की स्थिति देखी जा सके। मामले में अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को होगी।



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