Chittorgarh Drug Smuggler Arrested | Rajasthan ANTF Operation Madagat

Chittorgarh Drug Smuggler Arrested | Rajasthan ANTF Operation Madagat


राजस्थान में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने 26 महीने से फरार चल रहे 25 हजार रुपए के इनामी तस्कर ईश्वर उर्फ सिद्धार्थ को चित्तौड़गढ़ से गिरफ्तार किया है। आरोपी फलोदी जिले में एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामले

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आरोपी ईश्वर ने पिता के मौत के बाद उनके ही तस्करी नेटवर्क को आगे बढ़ाया।

कई बार दबिश के बाद मिली सफलता

एएनटीएफ लंबे समय से ईश्वर उर्फ सिद्धार्थ (20) पुत्र भग्गाराम बंजारा निवासी जीवन गायक का खेड़ा, थाना गंगरार, जिला चित्तौड़गढ़ पर नजर रखे हुए थी। टीम कई बार उसके गांव भी पहुंची, लेकिन नाम और पहचान के भ्रम के कारण वह हर बार पुलिस से बच निकलता था। गिरफ्तारी के लिए कई बार दबिश दी गई, लेकिन वह पहचान छिपाकर और ठिकाने बदलकर पुलिस को चकमा देता रहा।

मुखबिर की सूचना से खुला नाम बदलने का राज

इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि पुलिस जिस व्यक्ति को सिद्धार्थ के नाम से तलाश रही है, वह वास्तव में ईश्वर नाम से रह रहा है। साथ ही यह भी जानकारी मिली कि वह चित्तौड़गढ़-भीलवाड़ा हाईवे पर सोनियाणा के पास स्थित रामदेव होटल में किसी तस्कर से मिलने और मादक पदार्थ के सौदे का इंतजार कर रहा है।

सूचना मिलते ही ऑपरेशन ‘मदागत’ के तहत एएनटीएफ की टीम मौके पर पहुंची। होटल के आसपास घेराबंदी कर उसकी गतिविधियों पर नजर रखी गई। पहचान पक्की होते ही टीम ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। अचानक हुई कार्रवाई से आरोपी संभल भी नहीं पाया और मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।

पिता की मौत के बाद संभाला पूरा नेटवर्क

एएनटीएफ के महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि आरोपी का परिवार पहले से ही मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ा हुआ था। उसके पिता लंबे समय तक इस अवैध कारोबार में सक्रिय रहे और उन्होंने तस्करों, सप्लायरों तथा खरीदारों का बड़ा नेटवर्क तैयार कर रखा था।

साल 2022 में पिता की मौत के बाद उम्मीद थी कि बेटा इस धंधे से दूर हो जाएगा, लेकिन हुआ इसके उलट। आरोपी ने पिता के पुराने संपर्कों को अपने साथ जोड़ लिया। पिता के मोबाइल पर आने वाले कॉल और पुराने ग्राहकों से उसने खुद संपर्क शुरू किया और धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क की कमान संभाल ली।

कुछ ही समय में वह सौदे तय करने, मादक पदार्थ की व्यवस्था करने, भुगतान कराने और नए ग्राहकों को जोड़ने का काम करने लगा। पुलिस का कहना है कि आरोपी ने पिता के बनाए नेटवर्क को खत्म नहीं होने दिया, बल्कि उसे और मजबूत करते हुए कई नए लोगों को भी इस धंधे से जोड़ लिया।

ANTF ने गंगरार के एक होटल से आरोपी को पकड़ा।

मेवाड़ से मारवाड़ तक फैला सप्लाई नेटवर्क

जांच में सामने आया कि ईश्वर उर्फ सिद्धार्थ ने कम समय में मेवाड़ से लेकर मारवाड़ तक मादक पदार्थों की तस्करी का मजबूत नेटवर्क तैयार कर लिया था। वह मेवाड़ क्षेत्र से अवैध मादक पदार्थ की व्यवस्था कर मारवाड़ में सक्रिय तस्करों तक पहुंचाने का काम करता था।

हर खेप पर उसे मोटा मुनाफा मिलता था। पुलिस के अनुसार वह सप्लायर और खरीदार के बीच कड़ी का काम करता था। मांग के अनुसार माल की व्यवस्था करना, सौदे तय कराना और सुरक्षित तरीके से खेप पहुंचाना उसकी जिम्मेदारी थी। इसी वजह से वह तस्करी के नेटवर्क का अहम सदस्य बन गया था। पुलिस का कहना है कि वह लगातार अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहा था और नए लोगों को जोड़कर कारोबार बढ़ा रहा था।

पहचान बदली, नाम बदला और पुलिस को करता रहा गुमराह

पुलिस के अनुसार गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने काफी शातिर तरीका अपनाया। कुछ समय पहले मारवाड़ क्षेत्र में मादक पदार्थों की एक खेप भेजी गई थी। रास्ते में फलोदी पुलिस ने तस्करों को पकड़ लिया। जांच में सिद्धार्थ का नाम सामने आया। पुलिस कार्रवाई की भनक लगते ही उसने मोबाइल बंद कर दिया और फरार हो गया।

इसके बाद पुलिस ने कई बार उसके गांव और संभावित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन वह हाथ नहीं लगा। बाद में वह दोबारा गांव लौट आया, लेकिन उसने अपनी पहचान बदल ली। गांव में वह खुद को केवल “ईश्वर” नाम से बताता था, जबकि पुलिस रिकॉर्ड में उसका नाम “सिद्धार्थ” दर्ज था।

गांव के अधिकतर लोग भी उसे ईश्वर के नाम से ही जानते थे। यही वजह रही कि जब पुलिस सिद्धार्थ के बारे में पूछताछ करती तो लोग बताते कि इस नाम का कोई व्यक्ति गांव में नहीं रहता।

इतना ही नहीं, उसने अपने दिवंगत पिता के पुराने मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल भी जारी रखा, जिससे उस पर किसी को आसानी से शक नहीं हो सका। इसी वजह से वह लंबे समय तक पुलिस को गुमराह करता रहा।

फरारी में भी नहीं छोड़ा तस्करी का धंधा

साल 2024 में फलोदी जिले में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज होने के बाद आरोपी लगातार फरार चल रहा था। पुलिस के डर से वह कभी रिश्तेदारों के यहां तो कभी दूसरे सुरक्षित ठिकानों पर छिपता रहा। जांच में सामने आया कि फरार रहने के बावजूद उसने तस्करी का कारोबार बंद नहीं किया।

वह खुद सामने आने के बजाय अपने भरोसेमंद लोगों और बिचौलियों के जरिए सौदे तय करता था। पुराने संपर्कों के माध्यम से अलग-अलग तस्करों तक मादक पदार्थ पहुंचाने का काम जारी रहा। पुलिस का कहना है कि आरोपी गिरफ्तारी से बचते हुए भी इस अवैध कारोबार से लगातार आर्थिक फायदा उठाता रहा।

अब पूरे नेटवर्क की होगी जांच

एएनटीएफ अब आरोपी से पूछताछ कर उसके पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पिछले दो सालों में उसने किन-किन लोगों को तस्करी से जोड़ा, किन राज्यों तक मादक पदार्थ की सप्लाई की और उसके साथ कौन-कौन लोग सक्रिय थे।

अधिकारियों का मानना है कि आरोपी की गिरफ्तारी से मेवाड़ और मारवाड़ में सक्रिय मादक पदार्थ तस्करी के नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग मिल सकते हैं।



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