Mehla BDO Office Independence Day Flag Controversy
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के अधीन आते मैहला स्थित खण्ड विकास कार्यालय (BDO Office) में स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा न फहराए जाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। इस आरोप के बाद स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों की कार्
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प्रदेश सरकार द्वारा स्वतंत्रता दिवस समारोहों को लेकर राज्य भर में विशेष तैयारियां की गई थीं, जिसमें स्कूलों की छुट्टियों के शेड्यूल में बदलाव जैसे कड़े कदम भी शामिल थे। ऐसे में एक जिम्मेदार सरकारी कार्यालय में तिरंगा न फहराए जाने की बात पूरे क्षेत्र में भारी चर्चा और आक्रोश का विषय बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मैहला बीडीओ कार्यालय में ध्वजारोहण नहीं किया गया, जो कि एक सरकारी संस्थान में राष्ट्रीय पर्व के प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस बात की गहनता से जांच की जाए कि क्या राष्ट्रीय पर्व पर सरकारी कार्यालयों के लिए निर्धारित अनिवार्य कार्यक्रम के तहत यहाँ ध्वजारोहण का आयोजन हुआ था या नहीं।
स्थानीय जनता ने उठाए तीखे सवाल
इस लापरवाही पर भड़के लोगों ने प्रशासन के सामने कई तीखे सवाल रखे हैं: क्या कार्यालय में स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण का कार्यक्रम तय था? यदि कार्यक्रम निर्धारित था, तो राष्ट्रीय ध्वज क्यों नहीं फहराया गया और इसके लिए किस अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की गई थी? यदि किसी तकनीकी या अपरिहार्य कारणवश कार्यक्रम रद्द हुआ, तो क्या इसकी लिखित सूचना समय रहते उच्च अधिकारियों को दी गई थी?
क्या कहता है कानून?
भारतीय कानून के अनुसार, राष्ट्रध्वज के सम्मान और उसे फहराने के नियमों को ‘फ्लैग कोड ऑफ इंडिया, 2002’ और ‘प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971’ के तहत विनियमित किया जाता है। हालांकि, कानूनी जानकारों के मुताबिक केवल ध्वजारोहण न होने के आरोप को स्वतः राष्ट्रध्वज के अपमान का आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता। इसकी वास्तविक कानूनी और प्रशासनिक स्थिति विभागीय जांच के बाद ही साफ हो पाएगी।
बीडीओ ने टिप्पणी से किया इनकार, जांच की मांग तेज
इस पूरे विवाद जब खण्ड विकास अधिकारी (BDO) मैहला, बशीर खान से संपर्क साधा गया, तो उन्होंने इस विषय पर कोई भी टिप्पणी करने या अपना पक्ष रखने से साफ इनकार कर दिया। बीडीओ की इस चुप्पी के बाद मामला और संदिग्ध हो गया है। स्थानीय जनता ने जिला उपायुक्त (डीसी) चंबा से तुरंत हस्तक्षेप करने, तथ्यों को सार्वजनिक करने और यदि लापरवाही सिद्ध होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है।

