Robert Vadra Summonsed | Gurugram Land Scam Case; Court Orders Appearance May 16
राबर्ट वाड्रा कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद प्रियंका गांधी के पति हैं।
हरियाणा के गुरुग्राम के शिकोहपुर लैंड स्कैम से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें बढ़ सकती है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने केस में ED की चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए रॉबर्ट
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विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा ने आदेश दिया है कि वाड्रा सहित सभी आरोपी 16 मई को अदालत में पेश हों। ईडी ने 17 जुलाई 2025 को रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान वाड्रा के वकील ने कोर्ट से कहाकि ईडी की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान नही लेना चाहिए. उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का कोई मामला नहीं बनता है।
बता दें कि फरवरी 2008 में रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में 3.5 एकड़ जमीन 7.5 करोड़ रुपए में खरीदी थी। जमीन की यह डील उस समय हुई, जब हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी और भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री थे।
दस साल बाद 2018 में हरियाणा पुलिस ने रॉबर्ट वाड्रा, भूपेंद्र हुड्डा, DLF और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इस केस में वाड्रा के साथ हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी आरोपी हैं। उन पर आरोप है कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने वाड्रा की कंपनी को मुनाफा पहुंचाया।
लैंड स्कैम का यह मामला ग्राम पंचायत शिकोहपुर का है।
वाड्रा केस से जुड़ा पूरा मामला विस्तार से पढ़ें..
2008 में हुआ जमीन का सौदा फरवरी 2008 में रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में 3.5 एकड़ जमीन 7.5 करोड़ रुपए में खरीदी थी। उसी साल, तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अगुआई वाली हरियाणा सरकार ने इस जमीन पर 2.7 एकड़ के लिए व्यवसायिक कॉलोनी विकसित करने का लाइसेंस दिया। इसके बाद कॉलोनी बनाने की जगह स्काईलाइट कंपनी ने इस जमीन को DLF को 58 करोड़ रुपए में बेच दिया, जिससे लगभग 50 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ।
IAS अधिकारी ने म्यूटेशन रद्द किया 2012 में, तत्कालीन हरियाणा सरकार के भूमि रजिस्ट्रेशन निदेशक अशोक खेमका ने इस सौदे में अनियमितताओं का हवाला देते हुए जमीन के म्यूटेशन (स्वामित्व हस्तांतरण) को रद्द कर दिया। खेमका ने दावा किया था कि स्काईलाइट को लाइसेंस देने की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ और सौदा संदिग्ध था। इसके बाद, उनका तबादला कर दिया गया, जिससे यह मामला और विवादास्पद हो गया।
2018 में दर्ज की गई FIR साल 2018 में हरियाणा पुलिस ने रॉबर्ट वाड्रा, भूपेंद्र हुड्डा, DLF और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज के खिलाफ एक शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की थी। इसमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप में IPC की धारा 420, 120, 467, 468 और 471 के तहत मामला दर्ज किया गया था। बाद में IPC की धारा 423 के तहत नए आरोप जोड़े गए थे।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर ये आरोप जमीन की यह डील जब हुई, उस समय हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी और भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री थे। जमीन खरीदने के करीब एक महीने बाद हुड्डा सरकार ने वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी को इस जमीन पर आवासीय परियोजना विकसित करने की परमिशन दे दी। आवासीय परियोजना का लाइसेंस मिलने के बाद जमीन के दाम बढ़ जाते हैं।
लाइसेंस मिलने के मुश्किल से 2 महीने बाद ही, जून 2008 में, डीएलएफ वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी से यह जमीन 58 करोड़ में खरीदने को तैयार हो जाती है। यानी मुश्किल से 4 महीने में 700 प्रतिशत से ज्यादा का मुनाफा वाड्रा की कंपनी को होता है। 2012 में हुड्डा सरकार कॉलोनी बनाने वाले लाइसेंस को DLF को ट्रांसफर कर देती है।
ED ने FIR के आधार पर जांच शुरू की इसके बाद ईडी ने संदेह जताया कि इस सौदे में मनी लॉन्ड्रिंग हुई, क्योंकि जमीन की कीमत कुछ ही महीनों में असामान्य रूप से बढ़ गई। इसके अलावा यह भी संदेह जताया कि ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज एक फर्जी कंपनी थी। उसे सौदे में भुगतान के लिए इस्तेमाल किया गया।
जमीन की खरीद से जुड़ा चेक कभी जमा नहीं किया गया। ईडी ने 2018 में हरियाणा पुलिस की FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। यह जांच स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी की वित्तीय गतिविधियों और सौदे से प्राप्त आय पर केंद्रित है।
ED को संदेह, DLF को हुआ 5 हजार करोड़ का फायदा ईडी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी की वित्तीय लेनदेन, जमीन की खरीद-बिक्री, और DLF के साथ सौदे की जांच कर रही है। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस सौदे से प्राप्त आय का उपयोग अवैध गतिविधियों में किया गया। आरोप है कि DLF को इस सौदे में फायदा पहुंचाने के लिए हुड्डा सरकार ने नियमों का उल्लंघन किया। इसमें वजीराबाद में DLF को 350 एकड़ जमीन आवंटन का भी जिक्र है, जिससे डीएलएफ को कथित तौर पर 5,000 करोड़ रुपए का फायदा हुआ।
अप्रैल 2025 में ED दफ्तर जाने से पहले कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने पति रॉबर्ट वाड्रा को गले लगाया था।
राबर्ट वाड्रा से ईडी तीन बार कर चुकी पूछताछ
ईडी ने अप्रैल 2025 में इस मामले में वाड्रा को समन जारी किया था। 8 अप्रैल 2025 को पहला समन जारी किया, लेकिन वाड्रा उस दिन नहीं पहुंचे। इसके बाद 15 अप्रैल 2025 को वाड्रा ईडी दफ्तर पहुंचे। लगभग 6 घंटे तक पूछताछ हुई। PMLA के तहत उनके बयान दर्ज किए गए।
ईडी ने उन्हें अगले दिन16 अप्रैल को उन्हें फिर बुलाया और 5 घंटे पूछताछ की। इसके बाद 17 अप्रैल 2025 को लगभग 6 घंटे पूछताछ की गई थी।
वाड्रा ने इसे राजनीतिक मंशा से हुई कार्रवाई बताया था
पूछताछ के लिए ईडी ऑफिस जाते हुए वाड्रा ने कहा था कि ये कार्रवाई राजनैतिक मंशा से हो रही है। जब भी मैं लोगों की आवाज बुलंद करूंगा या राजनीति में आने की कोशिश करूंगा, ये लोग मुझे दबाएंगे और एजेंसियों का दुरुपयोग करेंगे। मैं हमेशा सभी सवालों के जवाब देता हूं और देता रहूंगा।
आगे कहा था कि केस में कुछ है ही नहीं। 20 बार गया हूं, 15-15 घंटे बैठा हूं। मैंने 23 हजार डॉक्यूमेंट दिए हैं, फिर कहते हैं दोबारा डॉक्यूमेंट दो, ऐसे थोड़ी चलता है।
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