आर्टिस्ट ने कैनवास पर अपने चेहरे के 24 भाव बनाए:नवीन स्वामी ने दो साल में बनाए आर्टवर्क; प्रदर्शनी में दिखे ज्यामितीय आकृतियों में अलग अंदाज

आर्टिस्ट ने कैनवास पर अपने चेहरे के 24 भाव बनाए:नवीन स्वामी ने दो साल में बनाए आर्टवर्क; प्रदर्शनी में दिखे ज्यामितीय आकृतियों में अलग अंदाज




जयपुर के जवाहर कला केंद्र की सुरेख आर्ट गैलरी में शुक्रवार से चित्रकार नवीन स्वामी की एकल चित्र प्रदर्शनी ‘भाव’ की शुरुआत हुई। 13 जुलाई तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में कलाकार ने अमूर्त (Abstract) चित्रों के माध्यम से मानवीय भावनाओं, मनोस्थितियों और भारतीय सांस्कृतिक प्रतीकों को बेहद सरल रंगों और ज्यामितीय आकृतियों में अभिव्यक्त किया है। प्रदर्शनी का उद्घाटन वरिष्ठ चित्रकार विद्यासागर उपाध्याय, नाथूलाल वर्मा, जगमोहन माथोडिया, मीनू श्रीवास्तव, मनीष शर्मा ने किया। इस मौके पर चित्रकार विनय शर्मा, पवन शर्मा, सोहन जाखड़, डॉ रजनीश हर्ष, संगीता सिंह, चन्द्रशेखर सेन सहित कई कलाकार मौजूद रहे। प्रदर्शनी के लिए 2 साल से जुटे बीकानेर के रहने वाले चित्रकार नवीन स्वामी करीब दो दशक से कला साधना में जुटे हैं। उन्होंने बताया- इस प्रदर्शनी की तैयारी में उन्हें लगभग दो साल का समय लगा। प्रदर्शनी में प्रदर्शित सभी चित्र उनके व्यक्तिगत अनुभवों, मनोभावों और जीवन के अलग-अलग मूड्स का कलात्मक रूप हैं। उन्होंने कहा- यह उनके भीतर के भावों की यात्रा है, जिन्हें उन्होंने रंग, आकृतियों और प्रतीकों के माध्यम से कैनवास पर उतारा है। शृंखला में सादगीपूर्ण अभिव्यक्ति को प्रमुखता नवीन स्वामी ने बताया- मैंने पूरी शृंखला में सरल रंगों और सादगीपूर्ण अभिव्यक्ति को प्रमुखता दी। चित्रों में किसी भी रंग की मिक्सिंग नहीं की गई है, बल्कि प्रत्येक रंग को उसकी मूल अवस्था में इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने बताया- हर रंग किसी विशेष भाव का प्रतिनिधित्व करता है और उसी भाव के अनुरूप चित्रों की आकृतियां तथा संरचना तैयार की गई है। उन्होंने बताया- प्रदर्शनी के कई चित्रों में उन्होंने शब्दों और छोटे-छोटे टेक्स्ट का प्रयोग किया है। वहीं कुछ चित्रों में पशु-पक्षियों के प्रतीकों को शामिल किया गया है। कुछ कैनवास पूरी तरह सादे रखे गए हैं, ताकि दर्शक स्वयं अपने भावों के अनुसार उन्हें महसूस कर सकें। उनका मानना है कि कला केवल देखने की नहीं बल्कि महसूस करने की प्रक्रिया है। सभी भावों का किया उपयोग प्रदर्शनी की विशेषता यह भी है कि इसमें प्रयुक्त ज्यामितीय आकृतियां भारतीय पारंपरिक संस्कृति और लोक स्थापत्य से प्रेरित हैं। कलाकार ने इन आकृतियों के माध्यम से आधुनिक अमूर्त कला और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के बीच एक सुंदर संवाद स्थापित करने का प्रयास किया है। प्रदर्शनी में दर्शकों को प्रेम, करुणा, हास्य, क्रोध, भय, आशावाद, आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प, भ्रम, संवेदनशीलता, आक्रामकता, आध्यात्मिक ज्ञान और अन्य मानवीय भावनाओं को अमूर्त रूप में देखने का अवसर मिल रहा है। इन भावों को सरल रंगों, रेखाओं और प्रतीकात्मक संरचनाओं के जरिए प्रस्तुत किया गया है, जिससे प्रत्येक चित्र दर्शकों को अपने भीतर झांकने के लिए प्रेरित करता है।



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