इसलिए बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं हमारे बीच:225 रुपए में फर्जी किरायानामा और फार्म में पार्षद का सील-साइन

इसलिए बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं हमारे बीच:225 रुपए में फर्जी किरायानामा और फार्म में पार्षद का सील-साइन




छत्तीसगढ़ एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) ने बीते 1 साल में 34 बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया, जिन्हें डिपोर्ट किया गया। कई घुसपैठिए चोरी, लूट, मानव तस्करी जैसे संगीन अपराधों में गिरफ्तार हुए और जेलों में सजा काट रहे हैं। इन सभी से जाली आधार कार्ड, पैन, वोटर आईडी और राशन कार्ड जैसे सरकारी दस्तावेज बरामद हुए। भास्कर ने जांच एजेंसियों से दस्तावेज हासिल किए और इन्हीं के आधार पर नए सरकारी दस्तावेज बनवाने की प्रक्रिया को न सिर्फ समझा, बल्कि दस्तावेज भी बनवाए।बांग्लादेशी घुसपैठिए शेख अकबर शमशुद्दीन (रायपुर जेल में बंद) के नाम पर रायपुर में 250 रुपए में किरायानामा बन गया। आधार कार्ड के अपडेट फॉर्म में पार्षद ने बिना जांचे-परखे सील-साइन कर दिए। इससे यह प्रमाणित हो गया है कि कोई भी घुसपैठिया, आतंकवादी या बाहरी व्यक्ति बड़ी आसानी से सरकारी दस्तावेज बनवा सकता है और भारत का नागरिक बन सकता है। खुद राज्य सरकार की जांच में सामने आया है कि छत्तीसगढ़ में 1800 संदिग्ध आधार कार्ड हैं, जिनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से बांग्लादेशी हैं, जो देश और राज्य की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। राज्य सरकार ने इन सभी संदिग्ध आधार कार्डों को सत्यापन के लिए केंद्र सरकार को भेजा है। भास्कर की जांच में यह भी सामने आया कि बांग्लादेशी घुसपैठिए छत्तीसगढ़ या देश के अन्य राज्यों में रहकर लोकल नेटवर्क के जरिए जरूरी दस्तावेज बनवाते हैं और फिर अंतरराष्ट्रीय रैकेट के माध्यम से इन्हें खाड़ी देशों में भेज दिया जाता है। छत्तीसगढ़ पुलिस, एटीएस, स्पेशल टॉस्क फोर्स और इंटेलिजेंस ऐसे ही संदिग्धों की खोजबीन में जुटी हुई हैं। 10 अप्रैल को उत्तराखंड के हरिद्वार में ऑपरेशन प्रहार के तहत पुलिस ने बांग्लादेशी महिला सलेहा बेगम को गिरफ्तार किया, जो फर्जी भारतीय पहचान बनाकर रह रही थी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर निवासी श्यामदास को भी पकड़ा गया, जिसने दस्तावेज बनवाने में मदद की। मामले में बड़े नेटवर्क की जांच जारी है। यहां से शुरू हुई भास्कर पड़ताल: क्योंकि राज्य ने केंद्र को जांच के लिए भेजे 1800 संदिग्ध आधार कार्ड ये हैं आधार बनवाने के आसान रास्ते रायपुर एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड ने 17 जून 2025 को 10 बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया था। इनके पास से फर्जी आधार, पैन कार्ड मिले। भास्कर ने ​इनके फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 10 माह बाद किरायानामा बनवा लिया। आधार अपडेशन फॉर्म में पार्षद ने सील-साइन कर दिए। इससे प्रमाणित होता है कि घुसपैठिए बड़ी आसानी से छत्तीसगढ़ में रहकर फर्जी दस्तावेज बनवा सकते हैं। -अब सम​झिए पूरी प्रक्रिया रास्ता 1- किरायानामा से चल रहा खेल नाम- शेख अकबर शमशुद्दीन। 1 अप्रैल 2026 से प्रशांत गुप्ता, पुरानी बस्ती के मकान पर किराए से रह रहा है।
प्रक्रिया- रिपोर्टर रायपुर जिला कोर्ट के नोटरी सेक्शन में पहुंचा। यहां किरायानामा बनाने वाले टेबल लगाए बैठे हैं। इनमें से एक की टेबल पर किरायानामा बनाने की फीस 250 रु., लिखी तख्ती टंगी है। बातचीत के बाद ये महिला हमें टाइपिस्ट के पास ले गई। टाइपिस्ट ने कम्प्यूटर पर पहले से सेट फॉर्मेट में नाम, पता बदला और 5 मिनट में 50 रु. के स्टाम्प पर किरायानामा रेडी करके महिला को दे दिया। फिर वह नोटरी कर्ता के पास गई- सील-साइन लिए और किरायानामा हमें सौंप दिया। हमसे मकान मालिक, किरायेदार के कोई दस्तावेज नहीं मांगे।
क्या होना चाहिए- जिसके नाम पर किरायानामा बन रहा है, वह मौजूद हो। उसका आधार सत्यापित किया जाए। रास्ता 2- आधार अपडेशन सर्टिफिकेट नाम- शेख अकबर शमशुद्दीन। वार्ड पार्षद ने सील-साइन लगाकर दे दिया कि ये व्यक्ति मेरे वार्ड में रह रहा है।
प्रक्रिया- बांग्लादेशी नागरिक शेख अकबर शमशुद्दीन (जो रायपुर जेल में बंद है) उसका आधार कार्ड भास्कर के पास था। इसमें पता संतोषीनगर लिखा था। हमने इसे चेंज करवाने के लिए श्याम प्लाजा स्थित आधार ऑफिस में संपर्क किया, उन्होंने फॉर्म दिया जिसमें पार्षद/सांसद/विधायक से वे​रीफाई करवाने ​का उल्लेख है। रिपोर्टर फॉर्म में सिर्फ ​शेख अकबर शमशुद्दीन लिखकर, फोटो लगाकर पार्षद कार्यालय पहुंचा। पार्षद ने कोई दस्तावेज नहीं मांगे। सिर्फ इतना पूछा- हमारे वार्ड के हो…। हां, बोलने पर सीधे सील लगाकर साइन कर दिए।
क्या होना चाहिए- पार्षद आधारकार्ड के जरिए, मकान मालिक से किराएदार की पहचान को सत्यापित करवाए। (नोट- घुसपैठिए 12वीं मार्कशीट, जन्म प्रमाणपत्र बनवाकर आसानी से आधार अपडेट या नया आधार कार्ड बनवा सकते हैं। 10 फरवरी को रायपुर में फूटा था बांग्लादेशी नेटवर्क, जानिए… कैसे होती है भारत में घुसपैठ 10 फरवरी 2025 को रायपुर एंटी टेररिस्ट स्क्वाड ने चार बांग्लादेशियों मो. इस्माइल, मो. शेख, अकबर और शेख साजन को गिरफ्तार किया। ये लंबे समय से टिकरापारा में रह रहे थे। इनके पास राशन कार्ड, आधार, पैन, वोटर आईडी और इराक का वीजा मिला। ये इराक भागने के लिए रायपुर से मुंबई पहुंचे थे। सभी जेल में हैं। जांच में सामने आया कि रायपुर के च्वॉइस सेंटर संचालक मो. आरिफ ने फर्जी दस्तावेज बनवाए थे। इस नेटवर्क को बांग्लादेशी शेख अली संचालित कर रहा था, जो बांग्लादेश भाग गया। 10 और लोगों भी अरेस्ट कर डिपोर्ट किया गया। -जानिए कैसे होती है घुसपैठ… इंटरनेशनल नेटवर्क
बॉर्डर पार कराने में इंटरनेशनल नेटवर्क घुसपैठियों की मदद करता है। बांग्लादेश-भारत सीमा 4,097 किमी लंबी है, जिसमें 2216.7 किमी पश्चिम बंगाल में है। यहां करीब 350 किमी क्षेत्र बिना फेंसिंग का है, जिसका फायदा उठाकर घुसपैठियों को प्रवेश दिलाया जाता है। नेशनल कनेक्शन
नेशनल कनेक्शन के लोग घुसपैठियों को विभिन्न राज्यों में बसाने में मदद करते हैं। वे इन्हें जिलों में भेजते हैं। जैसे पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से मुंबई और वहां से नागपुर व रायपुर भेजा जाता है। लोकल नेटवर्क
लोकल नेटवर्क घुसपैठियों को रहने और काम दिलाने में मदद करता है। रायपुर के संजय नगर, गोकुल नगर, संतोषी नगर, बिरगांव में पकड़े गए घुसपैठिए हमाली-ड्राइवरी करते थे। कोंडागांव में मजदूरी करते थे और चोरी के बाद फरार हो जाते थे। सभी कार्डों का केंद्र से सत्यापन होगा
बड़ी संख्या में संदिग्ध आधार कार्ड की पहचान हुई है। इनमें विदेशी नागरिक भी हैं, खासकर बांग्लादेश के। इन सभी कार्ड को सत्यापन के लिए केंद्र को भेजा गया है, अभी तक वहां से जवाब नहीं आया है।- विजय शर्मा, गृहमंत्री, छत्तीसगढ़



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