जालंधर में बसों के दरवाजों पर लटकी महिलाएं:कॉन्ट्रैक्ट बस कंडक्टर-ड्राइवरों की हड़ताल, 200 बसें डिपो में खड़ीं; महिला यात्री परेशान

जालंधर में बसों के दरवाजों पर लटकी महिलाएं:कॉन्ट्रैक्ट बस कंडक्टर-ड्राइवरों की हड़ताल, 200 बसें डिपो में खड़ीं; महिला यात्री परेशान




पंजाब कांट्रेक्ट बस ड्राइवर-कंडक्टर यूनियन की हड़ताल की कॉल पर आज सोमवार को जालंधर डिपो-1 और 2 के कांट्रेक्ट मुलाजिमों ने बसें नहीं चलाईं। लगभग 200 बसें डिपो में खड़ी कर दी गई हैं।
केवल वही ड्राइवर-कंडक्टर बस लेकर जा रहे हैं जो सरकारी हैं। दैनिक भास्कर टीम ने बस स्टैंड का दौरा किया तो वहां महिला यात्री परेशान दिखीं। पसीने से तर ब तर और चुनरी से पसीना पोंछ रही वृद्ध यात्री ने बताया कि उसने अमृतसर जाना है। पैना घंटा हो गया कोई सरकारी बस नहीं आ रही है।
सरकारें पता नहीं क्या करती हैं, इस बीच जैसे ही सरकारी बस आई तो महिलाएं की भीड़ चढ़ने के लिए टूट पड़ी। कई महिलाएं बस के दरवाजों तक से लटक गईं।
इस बीच अमृतसर जाने वाली एक महिला की बस छूट गई और भीड़ की वजह से वह बस में नहीं चढ़ पाई। इससे निराश होकर उसने कहा कि अब पैसे खर्च कर प्राइवेट बस में सफर करना पड़ेगा। मुझे तो ये भी समझ नहीं आ रहा है कि घर कैसे पहुंच पाऊंगी।
देखें यात्रियों की परेशानी के PHOTOS बस स्टैंड पर आधार कार्ड से यात्रा करने वाली महिलाएं परेशान
बस ड्राइवरों कंडक्टरों की भीड़ के चलते बस स्टैंड पर महिला यात्री परेशान दिखीं। यात्रियों ने बताया कि उनको यहां बैठे घंटों हो गए हैं लेकिन बसें नहीं आ रही हैं। जो भी बस आ रही है वो प्राइवेट है। उन्होंने आधार कार्ड दिखाकर यात्रा करनी थी लेकिन पता नहीं था कि आज हड़ताल है। कभी कोई सरकारी बस आती है तो उसमें भीड़ इतनी ज्यादा है कि सीट नहीं मिल पा रही और धक्का मुक्की हो रही है। उनको समझ नहीं आ रहा है कि सरकार मुलाजिमों की मांगों का हल क्यों नहीं करती। किलीमीटर स्कीम रद्द हो, कान्ट्रेक्ट मुलाजिम पक्के हों
डिपो-1 के प्रधान विक्रमजीत सिंह और प्रवक्ता चानण सिंह ने बताया कि सरकार उनकी मांगों को लिखित में मान चुकी है लेकिन उनको लागू नहीं कर रही। उनकी 2 मुख्य मांगों के साथ कई मांगें है। दो मुख्य मांगों में कान्ट्रेक्ट वर्कर्स को पक्का करना और किलोमीटर स्कीम में डाली जा रही नई बसों का टेंडर रद्द करना है।
इसे लेकर बीते 6 महीने में सरकार के साथ 4 बार से ज्यादा बातचीत हो चुकी है। जब भी वह चक्का जाम करते हैं तो सरकार उनके नुमाइंदों को चंडीगढ़ में मीटिंग के लिए बुला लेते हैं और लॉलीपॉप देकर भेज देते हैं।
सरकार हर बार झूठ बोलकर हड़ताल खत्म करवा लेती है, लेकिन इस बार वह पक्के तौर पर बैठ गए हैं। जब तक सरकार उनको मांगों को नहीं मान लेती और लागू नहीं कर देती तब तक वह बसें नहीं चलाएंगे।



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