नागपुर में रेडियोएक्टिव खतरे की धमकी वाली चिट्‌ठी मिली,अलर्ट:RSS मुख्यालय, मेट्रो और BJP ऑफिस में मटेरियल रखे जाने का जिक्र, जांच में कुछ नहीं मिला

नागपुर में रेडियोएक्टिव खतरे की धमकी वाली चिट्‌ठी मिली,अलर्ट:RSS मुख्यालय, मेट्रो और BJP ऑफिस में मटेरियल रखे जाने का जिक्र, जांच में कुछ नहीं मिला




नागपुर में एक अनजान चिट्ठी के बाद हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी कर दिया गया है। इस चिट्ठी में दावा किया गया कि RSS मुख्यालय,BJP ऑफिस और मेट्रो ट्रेनों में रेडियोएक्टिव मटेरियल रखा गया है। पुलिस के मुताबिक यह चिट्ठी 27 अप्रैल को पुलिस कमिश्नर डॉ. रविंदर सिंगल के ऑफिस में मिली थी। इसके बाद तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट किया गया। NDRF और परमाणु ऊर्जा विशेषज्ञों की मदद से सभी बताए गए स्थानों पर जांच की गई, लेकिन अब तक कोई रेडियोएक्टिव मटेरियल नहीं मिला है। इन स्थानों में रेडियोएक्टिव मटेरियल की धमकी मिली: चिट्ठी में खतरनाक रेडियोएक्टिव पदार्थ का जिक्र पुलिस को शक है कि यह चिट्ठी फर्जी हो सकती है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच जारी है। यह चिट्ठी अंग्रेजी में लिखी गई थी और खुद को DSS नाम के संगठन की बताती है। इसमें सीज़ियम-137 जैसे खतरनाक रेडियोएक्टिव पदार्थ का जिक्र किया गया था। चिट्ठी में खास तौर पर RSS मुख्यालय, स्मृति मंदिर और गणेशपेठ स्थित BJP ऑफिस का नाम लिया गया है। साथ ही दावा किया गया कि मेट्रो की ऑरेंज और एक्वा लाइन की ट्रेनों की सीटों के नीचे और इन इलाकों में चलने वाली बसों में भी यह मटेरियल रखा गया है। इसी में यह भी कहा गया कि यह रेडियोएक्टिव पदार्थ किसी कैंसर अस्पताल से लिया गया है और इससे पूरे शहर में रेडिएशन का खतरा हो सकता है। इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू पुलिस अधिकारियों ने बताया कि चिट्ठी मिलते ही सभी इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू कर दिए गए। ATS, NDRF और एक्सपर्ट टीमों ने सभी जगहों की गहन जांच की। ATS के एक अधिकारी ने कहा कि पहली नजर में यह मामला फर्जी लगता है, लेकिन जांच पूरी गंभीरता से की जा रही है। चिट्ठी में हाल ही में दोसर भवन मेट्रो स्टेशन के पास मिले डेटोनेटर और जिलेटिन स्टिक का भी जिक्र किया गया है। इसमें उस घटना की जिम्मेदारी लेते हुए इसे एक “चेतावनी” बताया गया है। इस मामले में ATS की शिकायत पर सदर थाने में केस दर्ज किया गया है। RSS मुख्यालय के आसपास पहले से ही CISF और नागपुर पुलिस की सुरक्षा रहती है, जिसे अब और बढ़ा दिया गया है। एक अन्य ATS अधिकारी ने कहा कि किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जा रहा है। निगरानी बढ़ा दी गई है और चिट्ठी भेजने वाले और DSS नाम के संगठन की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।



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