पुरानी इंडस्ट्रियल पॉलिसी के अटके केस शिफ्ट होंगे, उद्यमियों को 50 लाख तक कैपिटल सब्सिडी मिलेगी
भास्कर न्यूज | जालंधर इंडस्ट्री विभाग ने शुक्रवार को नई घोषणा की है, जो फैक्ट्रियां पुरानी इंडस्ट्रियल पॉलिसियों के तहत आर्थिक मदद ले रही थीं, अब वह खुद को नई इंडस्ट्रीयल पॉलिसी में भी माइग्रेट कर सकती हैं। उन्हें बस नई इंडस्ट्रीयल पॉलिसी के तहत लाभ लेने के लिए आवेदन करना होगा। इस संबंध में पत्र जारी कर दिया गया है। जालंधर की लेदर, स्पोर्ट्स और हैंड टूल इंडस्ट्री के लिए पंजाब सरकार की नई इंडस्ट्रियल एंड बिजनेस डेवलपमेंट पॉलिसी बड़ी राहत लेकर आई है। सरकार ने अब पुराने आवेदन को नई पॉलिसी के तहत माइग्रेट करने की अनुमति दे दी है। इसका सबसे बड़ा फायदा उन इकाइयों को होगा, जो सालों से पुरानी नीति के तहत सब्सिडी या रियायतों के लिए चक्कर काट रही थीं, लेकिन अब उन्हें नई नीति के तहत मिलने वाली कैपिटल सब्सिडी और स्टेट जीएसटी रिफंड का लाभ मिल सकेगा। जालंधर के थ्रस्ट सेक्टर यानी प्रमुख उद्योगों को नई नीति में 15 साल तक की टैक्स रियायतों का लाभ मिलेगा। .अधूरे आवेदन : वे इकाइयां, जिन्होंने पुरानी पॉलिसी के तहत आवेदन किया था, लेकिन अभी तक पैसा रिलीज नहीं हुआ है। अब वे बेहतर इनसेंटिव्स के लिए नई पॉलिसी चुन सकती हैं। . विस्तार और आधुनिकीकरण : पुरानी पॉलिसी में सिर्फ नई इकाइयों को बड़े लाभ मिलते थे। अब जालंधर की पुरानी स्पोर्ट्स और लेदर फैक्ट्रियां अगर नई मशीनरी लगाती हैं, तो उन्हें नई पॉलिसी के तहत 50 लाख रुपये तक की डायरेक्ट कैपिटल सब्सिडी मिलेगी। टैक्स बेनिफिट्स का चुनाव : उद्यमी अब यह चुन सकते हैं कि उन्हें पुराने वैट आधारित लाभ चाहिए या नई नीति के तहत 100% नेट स्टेट जीएसटी रिफंड (7 से 15 साल तक के लिए)। जालंधर पंजाब का इकलौता शहर है, जिसकी एक खास ग्लोबल पहचान है। देश के कुल खेल उत्पादों के निर्यात का करीब 35-40% हिस्सा जालंधर से जाता है। उत्तर भारत का लेदर कॉम्प्लेक्स यहीं है, जहां से जूते तथा गारमेंट्स में खपत होने वाला चमड़ा बनता है। फोकल पॉइंट, उद्योग नगर, बुलंदपुर, राओवाली में 1200 से ज्यादा इकाइयां कास्टिंग, हैंडटूल, पाइप फिटिंग जैसे सामान बनाती हैं। जालंधर में 90% से ज्यादा उद्योग सूक्ष्म, लघु और मध्यम श्रेणी के हैं। नई पॉलिसी में एमएसएमई के लिए एम्प्लॉयमेंट सब्सिडी की सीमा घटाकर 25 करोड़ के निवेश तक कर दी गई है, जिससे यहां के छोटे कारखानेदारों को करोड़ों का फायदा होगा।
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