बाबेल चौराहे की संपत्ति पर रात में मरम्मत शुरू:दिगंबर जैन समाज ने विरोध किया; मामला SDM कोर्ट पहुंचा
झाबुआ शहर के बाबेल चौराहे पर स्थित एक पुरानी और बेशकीमती संपत्ति पर देर रात मरम्मत कार्य शुरू होने से विवाद गहरा गया है। इस संपत्ति पर न्यायालयीन प्रकरण चल रहा है और नगर पालिका ने इसे जर्जर घोषित कर गिराए जाने वाली सूची में शामिल किया है। देर रात अचानक शुरू हुए इस कार्य का दिगंबर जैन समाज ने विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। यह मामला अब एसडीएम कोर्ट तक पहुंच गया है। जानकारी के अनुसार, यह भवन 319 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। रात के सन्नाटे में निर्माण कार्य की सूचना मिलते ही दिगंबर जैन समाज के सदस्य मौके पर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद गुरुवार को यह मामला एसडीएम कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। प्रशासनिक नोटिस के बावजूद भवन को गिरने से बचाने के लिए कब्जेधारी मोदी परिवार द्वारा की गई इस कोशिश पर कई सवाल उठ रहे हैं। जैन समाज ने आरोप लगाया है कि जब संपत्ति के मालिकाना हक का मामला पहले से ही एसडीएम कोर्ट में विचाराधीन है, तो ऐसे में रात के अंधेरे में निर्माण कार्य शुरू करना संदिग्ध है। उल्लेखनीय है कि मई 2025 में भी इसी तरह रात के समय भवन की पहली और दूसरी मंजिल को गिराने के साथ ही भूतल की छतों की मरम्मत का कार्य किया गया था। वर्तमान में इस भूतल पर 12 दुकानें संचालित हैं। दोनों पक्षों के दावे इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। दिगंबर जैन समाज का दावा है कि सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में यह संपत्ति पिछले 73 वर्षों से और नजूल रिकॉर्ड में 46 वर्षों से उनके नाम पर दर्ज है। समाज ने प्रशासनिक चूक पर सवाल उठाते हुए कहा कि संपत्ति उनके नाम होने के बावजूद नपा द्वारा नोटिस किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने 17 मई 2025 और 28 जून 2025 को दो बार जनसुनवाई में भी इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। वहीं, मोदी परिवार का तर्क है कि यह संपत्ति पीढ़ी-दर-पीढ़ी उनके परिवार के नाम पर हस्तांतरित होती आ रही है। परिवार का दावा है कि वर्ष 2016 तक इस संपत्ति का नियमित नगर पालिका टैक्स उनके द्वारा ही भरा जाता रहा है।
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