बालाघाट के 78 साल पुराने गरबा में आए कई बदलाव:पहले महिलाएं घुंघट में खेलती थीं, अब पुरुष भी साथ, डीजे पर बजते हैं गाने
बालाघाट का गुजराती समाज 78 सालों से नवरात्र पर गरबा आयोजित कर रहा है, जिसमें कई बदलाव आए हैं। पहले महिलाएं घुंघट में साड़ी पहनकर नगाड़ों की थाप पर देवी गीत गाती थीं। दशकों पहले, गरबा में मूर्ति स्थापना नहीं होती थी। लकड़ी की गरबी के आसपास दुर्गा के नौ रूपों की फोटो रखकर घट स्थापित होता था। पुरुष तब गरबा में शामिल नहीं होते थे। 30 साल पहले मूर्ति स्थापना शुरू हुई गुजराती समाज की महिला उपाध्यक्ष मीना चावड़ा ने बताया कि 30 साल पहले दुर्गा मां की मूर्ति स्थापित होना शुरू हुई, जिसके बाद गरबा में बदलाव आए। अब 15-20 सालों से पुरुष और महिलाएं साथ गरबा करते हैं। अहमदाबाद के मिलन देवमणि आएंगे पहले ऑर्केस्ट्रा के साथ गरबा होता था, अब अहमदाबाद से डीजे आता है। युवा पीढ़ी चनिया-चोली पहनकर गरबा करती है। गरबा स्टेज भी रेत की जगह अब लाइटिंग फ्लोर पर होता है। अहमदाबाद के मिलन देवमणि डीजे पर गरबा गीत बजाएंगे। उन्होंने बताया कि इस बार नवरात्र में रात्रि में होने वाले गरबा के साथ ही पूरे नौदिनों तक सामाजिक बच्चों, महिलाओं के लिए प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जा रहा है। इसमें गरबा सजाना, डांडिया सजाना, रूई के जेवर बनाने जैसी अन्य प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसके अलावा नवरात्र की पंचमी और अष्टमी पर विशेष रूप से कृष्ण, शिव, शिव-पार्वती थीम पर गरबा खेला जाएगा।
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