बिलासपुर के 6 कोचिंग-सेंटर की जांच, 5 में मिली खामियां:फायर सेफ्टी, बिल्डिंग परमिशन और इमरजेंसी गेट में मिलीं कमियां, एक सील
लखनऊ के कोचिंग सेंटर में आग लगने के बाद बिलासपुर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नगर निगम ने जांच अभियान शुरू किया है। 2 साल पहले दिल्ली के कोचिंग सेंटर में हुई घटना के बाद भी जांच की गई थी, लेकिन उसके बाद लंबे समय तक कोई विशेष अभियान नहीं चलाया गया। मंगलवार को नगर निगम टीम ने शहर के 6 कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण किया, जिनमें से 5 में सुरक्षा संबंधी खामियां पाई गईं। हालांकि कार्रवाई के तहत केवल एक कोचिंग सेंटर को सील किया गया, जबकि बाकी पांच संस्थानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। शहर में वर्तमान में करीब 80 कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं। ज्यादातर संस्थानों में भवन अनुज्ञा, आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण और अन्य सुरक्षा मानकों की स्थिति स्पष्ट नहीं पाई गई। उपायुक्त अंकुर पांडे के नेतृत्व में निकली निगम की टीम ने निरीक्षण के दौरान उड़ान एकेडमी में फायर सेफ्टी और बिल्डिंग परमिशन से जुड़े आवश्यक नियमों का पालन नहीं पाया। इसके अलावा विद्यार्थियों की सुरक्षा से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रावधानों में भी गंभीर कमियां सामने आईं। सुरक्षा मानकों की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उड़ान एकेडमी को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। इन संस्थानों की हुई जांच, कई खामियां मिलीं नगर निगम की टीम ने शहर के छह कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया। इनमें उड़ान आईएएस, चंद्रा एकेडमी, आचार्य एकेडमी, ऑक्सीडेशन कोचिंग, प्रीमियर एकेडमी और पटेल ट्यूटोरियल शामिल हैं। निरीक्षण के दौरान फायर सेफ्टी व्यवस्था, भवन अनुज्ञा, आपातकालीन निकासी मार्ग और अन्य आवश्यक सुविधाओं की जांच की गई। जिन संस्थानों में कमियां पाई गईं, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। हादसे के बाद ही सक्रिय होता है निगम कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा जांच का सिलसिला अक्सर किसी बड़े हादसे के बाद ही शुरू होता है। इससे पहले 24 अगस्त 2024 को दिल्ली के एक कोचिंग सेंटर में आगजनी की घटना के बाद नगर निगम और जिला प्रशासन ने संयुक्त अभियान चलाया था। उस दौरान पार्किंग, फायर सेफ्टी सिस्टम और आपातकालीन निकासी व्यवस्था नहीं मिलने पर कंपीटिशन लाइब्रेरी और कम्युनिटी एकेडमी समेत चार संस्थानों को सील किया गया था। हालांकि इसके बाद जांच अभियान लंबे समय तक ठंडे बस्ते में चला गया। जानिए, कहां-कहां मिलीं कमियां उड़ान आईएएस में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही गेट मिला। संस्थान में फायर सेफ्टी सिस्टम और लिफ्ट की व्यवस्था नहीं थी। चार मंजिला भवन के अनुपात में पार्किंग की भी पर्याप्त सुविधा नहीं पाई गई। वहीं करीब 700 विद्यार्थियों के हिसाब से भवन में पर्याप्त जगह का अभाव था। इन गंभीर खामियों को देखते हुए नगर निगम ने संस्थान को सील कर दिया। वहीं चंद्रा एकेडमी, आचार्य एकेडमी, ऑक्सीडेशन कोचिंग, प्रीमियर एकेडमी और पटेल ट्यूटोरियल समेत अन्य संस्थानों में भी कई कमियां मिलीं। किसी संस्थान के पास आवश्यक लाइसेंस नहीं था तो कहीं फायर सेफ्टी सिस्टम का अभाव पाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि कई जगह फायर सेफ्टी उपकरणों की कमी थी, जबकि कुछ संस्थानों में भवन अनुज्ञा और अन्य जरूरी दस्तावेज संतोषजनक नहीं मिले। इन सभी संस्थानों को नोटिस जारी कर कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर कमियां दूर नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शहर में बड़ी संख्या में छात्र कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरी का उपयोग करते हैं। ऐसे में सुरक्षा मानकों की नियमित जांच बेहद जरूरी है।
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