बेगूसराय में राजेंद्र पुल से गंगा नदी में गिरा युवक:500 मीटर तक तेज धार में बहा, गोताखोरों ने बचाई जान; पीड़ित बोला- जिंदा बचने की उम्मीद नहीं थी
बेगूसराय के सिमरिया घाट पर बड़ा हादसा टल गया। पुल पर खड़े होकर उफनती गंगा का नजारा देख रहा एक युवक अचानक नदी की तेज धारा में जा गिरा। पानी का बहाव इतना तेज था कि युवक देखते ही देखते बहने लगा। स्थानीय गोताखोरों की मुस्तैदी और साहस के कारण उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन का एक वीडियो भी सामने आया है। पीड़ित की पहचान नीम कुमार के तौर पर हुई है। चक्कर आने के चलते बिगड़ा बैलेंस जानकारी के अनुसार नीम कुमार पुल के ऊपर से गंगा नदी की विशाल लहरों को देख रहा था। इसी दौरान उसे अचानक तेज चक्कर आ गया और वह खुद को संभाल नहीं पाया। संतुलन बिगड़ते ही वह पुल की ऊंचाई से सीधे नीचे उफनती गंगा में गिर गया। गंगा नदी में इस समय जलस्तर काफी बढ़ा हुआ है और धारा अत्यंत तेज है। नदी में गिरते ही युवक बहने लगा।उसने खुद को तैरकर बचाने की काफी कोशिश की, लेकिन पानी का बहाव उसे करीब 500 मीटर दूर तक बहा ले गया। जैसे ही युवक पुल से नीचे गिरा, आसपास मौजूद लोगों और घाट पर उपस्थित श्रद्धालुओं की नजर उस पर पड़ी। देखते ही देखते पूरे घाट पर चीख-पुकार और हड़कंप मच गया। स्थानीय गोताखोर ने बचाई जान शोर सुनकर घाट पर मौजूद स्थानीय गोताखोर अनिल कुमार और उनके साथी तुरंत हरकत में आ गए। समय तेजी से बीत रहा था और युवक बहता हुआ दूर निकल रहा था। लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक बड़ी लाचारी भी उजागर हुई। हादसे के समय जब गोताखोर युवक को बचाने दौड़े, तो पता चला कि मोटरबोट खराब है। ऐसे में गोताखोर अनिल ने एक निजी लकड़ी की नाव को लेकर नदी में तेजी से आगे बढ़ा। टीम के साथ पूरी ताकत लगाकर नदी की धारा के बीच पहुंचे। घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर जाकर उन्होंने देखा कि युवक किसी तरह सिर ऊपर उठाकर तैरने का प्रयास कर रहा है। नाव को तुरंत उसके पास ले जाया गया और एक मोटी रस्सी उसकी तरफ फेंकी गई। युवक ने हिम्मत जुटाकर रस्सी को मजबूती से पकड़ लिया। इसके बाद गोताखोरों ने सहारा देकर उसे सुरक्षित नाव पर चढ़ा लिया। नाव के किनारे पहुंचते ही वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। ‘जिंदा बचने की उम्मीद नहीं थी’ घाट पर सुरक्षित पहुंचे पीड़ित युवक ने बताया कि मैं पुल पर खड़ा होकर नदी देख रहा था, तभी अचानक चक्कर आ गया और मैं नीचे गिर पड़ा। मेरा फोन भी पानी में गिर गया। मुझे लगा कि अब मेरी जान नहीं बचेगी, लेकिन गोताखोरों की वजह से मुझे नई जिंदगी मिली है। इधर, हादसे के बाद सिमरिया में श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर सवाल खड़ा हो गया है। मौके पर मौजूद संजय झा सहित अन्य लोगों ने कहा कि उफनती नदी के सीजन में सरकारी मोटरबोट का खराब होना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि गोताखोर अनिल निजी नाव से समय पर नहीं पहुंचते, तो बड़ा हादसा हो सकता था। फिलहाल युवक पूरी तरह सुरक्षित है।
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