भारतेंदु नाट्य अकादमी का नाटक काकोरी एक्शन:काकोरी शताब्दी पर देशभक्तों की गाथा जीवंत
लखनऊ के भारतेंदु नाट्य अकादमी की ओर से प्रस्तुत नाटक ‘काकोरी-एक्शन’ का मंचन किया गया। यह नाटक काकोरी शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभक्त क्रांतिकारियों की गाथा को जीवंत करता है। इसकी कहानी एक दिलचस्प मोड़ से शुरू होती है, जहाँ शाहजहांपुर का एक नाट्य दल अपनी प्रस्तुति देने लखनऊ जा रहा होता है। नाटक की शुरुआत में, काकोरी स्टेशन पर ठीक उसी ऐतिहासिक स्थान पर दल की बस खराब हो जाती है, जहाँ 100 साल पहले क्रांतिकारियों ने 8 डाउन पैसेंजर ट्रेन से अंग्रेजों का खजाना लूटा था। बस खराब होने पर कलाकार पहले तो उकता जाते हैं और मैनेजर से बहस करने लगते हैं, जो कम बजट की मजबूरी बताता है। अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति का बिगुल बजा हालांकि, जैसे ही कलाकारों को यह अहसास होता है कि वे उसी पवित्र और ऐतिहासिक भूमि पर खड़े हैं, जहाँ से अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति का बिगुल बजा था, उनकी नाराजगी राष्ट्रभक्ति के रोमांच में बदल जाती है। लखनऊ यहाँ से केवल 15 किलोमीटर दूर है, और बस ठीक होने तक कलाकार वहीं अपने थीम सॉन्ग का रिहर्सल शुरू कर देते हैं। वीर गाथा कों गीतों के माध्यम से जीवंत किया अमृत पुरस्कार और कला भूषण से सम्मानित लोकप्रिय नाटककार सुशील कुमार सिंह ने इस नाटक का लेखन किया है, जबकि डॉ. सुमित श्रीवास्तव ने इसका निर्देशन किया है। यह नाटक रामप्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक उल्ला ख़ाँ, शचीन्द्रनाथ बख्शी, और राजेन्दनाथ लाहिड़ी जैसे महान क्रांतिकारियों की वीरता, त्याग और देशप्रेमी गीतों के माध्यम से ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंकने के उनके जज्बे को जीवंत करता है।
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