भिवानी में गाय का 5 घंटे ऑपरेशन:पेट में मिली लोहे की कीलें, चिकित्क बोले- चारे में खाई, पशुपालक बरतें सावधानी
भिवानी के गांव नौरंगाबाद निवासी पशुपालक की गाय का भिवानी पॉलीक्लिनिक में करीब 5 घंटे ऑपरेशन किया और पेट से लोहे की कीलें व अन्य चीजें निकाली। साथ ही पेट में पानी भरा होने के कारण गाय को दिक्कत हो रखी थी और पशुपालक गाय को उपचार के लिए हिसार तक लेकर गया। जिसका भिवानी में ऑपरेशन करके ठीक किया। गांव नौरंगाबाद निवासी पशुपालक अभिषेक शर्मा ने बताया कि उनकी देशी नशल की गाय है। जिसको कई दिनों से दिक्कत थी। 10-15 दिन से खाना-पीना कम कर दिया था। इसके बाद वे हिसार लेकर गए थे, वहां चेकअप किया और एक्स-रे किए। जिसमें बताया कि पेट में पानी भरा है और लोहा भी है। उसकी गाय 10-12 किलो दूध की गाय है। ऑपरेशन होने के बाद फिलहाल गाय ठीक है। चिकित्सकों की टीम ने किया गाय का ऑपरेशन
भिवानी पॉलिक्लीनिक के इंचार्ज डॉ. सुभाष ने बताया कि गांव नौरंगाबाद के पशुपालक अभिषेक की गाय के पेट में लोहे की वस्तु जाने के कारण दिक्कत होने पर उनके पास लाया गया था। इससे पहले वे गाय को लुहास यूनिवर्सिटी हिसार लेकर गए थे, वहां एक्स-रे करवाया तो पता लगा और डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने के लिए कहा। इसके बाद पशु पालक गाय को भिवानी के पॉलिक्लीनिक में लेकर पहुंचा। जहां पर चिकित्सकों की टीम ने गाय का ऑपरेशन किया। जिस टीम में भिवानी पॉलिक्लीनिक के इंचार्ज डॉ. सुभाष, पशु चिकित्सक डॉ. जोनी, वीएलडीए विरेंद्र, वीएलडीए दीपक, बीएलईओ रणसिंह, पशु सहायक ईमानदार व अजीत शामिल रहे। 5 घंटे में किया ऑपरेशन
डॉ. सुभाष ने बताया कि इस ऑपरेशन में टीम को करीब 5 घंटे का समय लगा। क्योंकि ऑपरेशन काफी जटिल था। क्योंकि पेट में करीब 15 लीटर पानी भी भरा हुआ था, करीब डेढ़ घंटे का समय पानी निकालने में लगा। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सफल् रहा, जो अब गाय 4-5 दिन में स्वस्थ हो जाएगी। उन्होंने बताया कि पेट के अंदर 4 हिस्स (पेट) होते हैं, बड़े पेट (रूमन) में पॉलीथिन जमा हो जाता हैं। नीचे रेटिकुलम पेट में नुकीली व लोहे की चीजें जमा हो जाती है। जो हार्ट के नजदीक होता है। पशु के चलने-फिरने से पेट हिलने पर नुकीली चीजें हार्ट में घुस जाती है और घाव में मवाद बनने से पशु की हालत गंभीर हो जाती है। उन्होंने बताया कि चारे में ये नुकीली चीजें व कीलें खाई गई होंगी। इसलिए पशुपालक सावधानी बरतें, ताकि इस तरह की स्थिति में पशु को पहुंचने से बचाया जा सके।
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