मंगोलिया भेजे गए बुद्ध के शिष्यों के अस्थि कलश:सांची में दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर', भोपाल एयरपोर्ट से होगी विदाई; 24 घंटे सशस्त्र सुरक्षा घेरा

मंगोलिया भेजे गए बुद्ध के शिष्यों के अस्थि कलश:सांची में दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर', भोपाल एयरपोर्ट से होगी विदाई; 24 घंटे सशस्त्र सुरक्षा घेरा




विश्व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ सांची में रखे भगवान गौतम बुद्ध के परम शिष्यों (अर्हन्त सारिपुत्र और अर्हन्त महामोग्गलान) के पवित्र अस्थि कलश 28 मई को मंगोलिया के लिए रवाना हुआ। यह दूसरा मौका है जब इन पवित्र अवशेषों को दर्शनार्थ विदेश भेजा जा रहा है इससे पहले इन्हें थाईलैंड भेजा गया था। इस यात्रा से भारत और मंगोलिया के धार्मिक व सांस्कृतिक संबंध मजबूत होने और सांची में विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। बुधवार सुबह 7 बजे चैतन्यगिरि विहार मंदिर के मुख्य तहखाने से 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी में अस्थि कलश बाहर निकाले गए। लगभग एक घंटे तक बौद्ध भिक्षुओं ने मंत्रोच्चार और विशेष पूजा-अर्चना की।
गार्ड ऑफ ऑनर के बाद विशेष बॉक्स में किए सील सुबह 9 बजे सशस्त्र सुरक्षा बलों ने पवित्र अवशेषों को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद अस्थि कलशों को बुलेटप्रूफ और शॉक-प्रूफ विशेष बॉक्स में सील कर कड़ी सुरक्षा के बीच सड़क मार्ग से भोपाल एयरपोर्ट के लिए रवाना किया गया। रायसेन एसडीएम मनीष शर्मा ने बताया कि ASI और केंद्र सरकार की तकनीकी टीम ने पहले ही अस्थि कलशों का वैज्ञानिक परीक्षण, सत्यापन और नाप-तौल की प्रक्रिया पूरी कर ली थी। पूरा मिशन ‘सोवरेन गारंटी’ प्रोटोकॉल के तहत संचालित किया जा रहा है। भोपाल से दिल्ली, फिर मंगोलिया भेजे जाएंगे अवशेष भोपाल एयरपोर्ट पर विदाई समारोह आयोजित होगा। यहां से विशेष विमान के जरिए अवशेषों को दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय भेजा जाएगा। तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन्हें मंगोलिया रवाना किया जाएगा। मंगोलिया की राजधानी उलानबटार स्थित गंडन तेगचेनलिंग मठ में इन पवित्र अस्थि कलशों को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखा जाएगा। 1809 में स्थापित यह मठ मंगोलिया का प्रमुख बौद्ध केंद्र माना जाता है। तिब्बती शैली में बने इस मठ में 26 मीटर ऊंची स्वर्णमंडित अवलोकितेश्वर प्रतिमा स्थापित है। ऐसा होता है पवित्र अवशेषों का सुरक्षा प्रोटोकॉल पवित्र अस्थि कलशों को राजकीय अतिथि का दर्जा दिया जाता है। यात्रा के दौरान इन्हें 24 घंटे सशस्त्र सुरक्षा घेरे में रखा जाता है। रूट पूरी तरह गोपनीय रहता है और एडवांस पायलट वाहन साथ चलता है। अवशेषों को स्मार्ट क्लाइमेट कंट्रोल, बुलेटप्रूफ और शॉक-प्रूफ केस में सुरक्षित रखा जाता है। ASI की टीम माइक्रोग्राम स्तर तक वैज्ञानिक जांच कर डिजिटल लॉग तैयार करती है। एसडीएम मनीष शर्मा के अनुसार मंगोलिया में करीब 10 दिनों तक श्रद्धालु इन पवित्र अवशेषों के दर्शन करेंगे। इसके बाद तय सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल के तहत अस्थि कलशों को वापस सांची लाया जाएगा। देखिए गुरुवार सुबह की तस्वीरें…



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