मंत्रियों पर टिप्पणी: गुना विधायक की बढ़ेंगी मुश्किलें:जिलाध्यक्ष ने प्रदेश संगठन को भेजी रिपोर्ट; विधायक पन्नालाल के समर्थन में आईं पूर्व विधायक ममता मीना

मंत्रियों पर टिप्पणी: गुना विधायक की बढ़ेंगी मुश्किलें:जिलाध्यक्ष ने प्रदेश संगठन को भेजी रिपोर्ट; विधायक पन्नालाल के समर्थन में आईं पूर्व विधायक ममता मीना




गुना शहर में लगातार हो रही बेतहाशा बिजली कटौती के मुद्दे पर अपनी ही सरकार के दो सिंधिया समर्थक कद्दावर मंत्रियों के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य की मुश्किलें बढ़ गई हैं। संगठन ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई है। बिजली कंपनी के दफ्तर पहुंचकर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को नाकारा कहकर घेरने वाले विधायक शाक्य पर अब प्रदेश संगठन द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की तैयारी कर ली गई है। इस बात के स्पष्ट संकेत रविवार को भाजपा जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह सिकरवार ने मीडिया से चर्चा के दौरान दिए। जिलाध्यक्ष ने विधायक के इस कृत्य को अनुशासनहीनता के दायरे में लाते हुए साफ कहा कि पार्टी में इस तरह की बयानबाजी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पूरे मामले से वरिष्ठ नेतृत्व को अवगत करा दिया गया है। भाजपा जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह सिकरवार ने विधायक पन्नालाल शाक्य के बयान पर कहा, चाहे मंत्री हो, विधायक हो या कार्यकर्ता पदाधिकारी, सार्वजनिक जगह पर किसी को भी अनुमति नहीं है किसी के बारे में उल्टी सीधी बयानबाजी करने की। हमारी भाजपा संगठन अनुशासन को जानी जाती है। भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता अनुशासन का पालन करता है। कल मैंने भी उनका बयान सोशल मीडिया पर देखा है। वास्तव में बहुत निंदनीय है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि पन्नालाल जी हमारे वरिष्ठ विधायक हैं लेकिन उन्होंने प्रभारी मंत्री और ऊर्जा मंत्री के बारे में जो कहा है वास्तव में वह बहुत गलत है। ऐसी बयानबाजी उन्हें नहीं करना चाहिए। मैंने प्रदेश संगठन को अवगत करा दिया है पूरी जानकारी दे दी है, शीघ्र ही उन पर कार्रवाई होगी। जिलाध्यक्ष सिकरवार ने पार्टी के आंतरिक अनुशासन का हवाला देते हुए आगे कहा, यदि हमें कुछ कहना है तो हमारे पास प्लेटफॉर्म हैं। वह पहले जिलाध्यक्ष, जिले के प्रभारी, संभाग प्रभारी से बात करें। यदि कोई बात वहां नहीं बन रही है तो प्रदेशाध्यक्ष से बात करें। मैं ऐसी बयान की इजाजत किसी को नहीं दूंगा, चाहे वह मंत्री हो, विधायक हो या कोई पदाधिकारी, कार्यकर्ता। ऐसी बयानबाजी आगे से नहीं होगी मैं आपको आश्वस्त करता हूं। कल जो हुआ है उससे प्रदेश संगठन को अवगत करा दिया है, प्रदेश नेतृत्व ही इस पर निर्णय करेगा। वह लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। विधायक के समर्थन में उतरीं पूर्व विधायक इस मामले में अब चाचौड़ा की पूर्व विधायक और वर्तमान आम आदमी पार्टी (AAP) नेता ममता मीना भी पन्नालाल शाक्य के समर्थन में खुलकर मैदान में उतर आई हैं। ममता मीना ने भाजपा में चल रहे अंतर्विरोध पर तीखा हमला बोलते हुए ‘नई भाजपा बनाम पुरानी भाजपा’ की बहस को हवा दे दी है। ​पूर्व विधायक ममता मीना ने गुना विधायक का समर्थन करते हुए कहा, “पन्नालाल जी कोई नए विधायक नहीं हैं, वे संगठन के बहुत पुराने और जमीन से जुड़े नेता हैं। उन्होंने जो आवाज उठाई है, वह किसानों, छात्रों और व्यापारियों के हित की बात है।” चाचौड़ा के हालातों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस भीषण गर्मी में रात के 10 बजे लाइट जाती है और सुबह 2 बजे आती है। मेंटेनेंस के नाम पर सुबह 8 से शाम 5 बजे तक बिजली काट दी जाती है। एक पत्ता भी हिलता है तो बिजली गुल हो जाती है। ऐसी स्थिति में जनता त्रस्त है और पन्नालाल जी ने सड़कों पर उतरकर अधिकारियों से बात कर जनता की आवाज को बुलंदी से उठाया है। ​ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर पर निशाना साधते हुए ममता मीना ने कहा, “विधायक जी का दर्द बिल्कुल सही है। ऊर्जा मंत्री को नौटंकी करने की क्या जरूरत है? कभी वे नाली में उतर जाते हैं, तो कभी पुल पर चढ़ जाते हैं।” उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल उस वीडियो का भी जिक्र किया जिसमें प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, विधायक पन्नालाल शाक्य को कथित तौर पर धक्का देकर साइड करते नजर आ रहे हैं। ममता मीना ने कहा कि पहले भाजपा में ऐसी स्थिति कभी नहीं होती थी। ​लंबे समय तक भाजपा में रहीं ममता मीना ने पार्टी के वर्तमान हालातों पर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए प्रशिक्षण वर्ग में नई और पुरानी भाजपा का अंतर स्पष्ट दिख रहा है। आज की नई भाजपा ‘महाराज’ (ज्योतिरादित्य सिंधिया) वाली भाजपा है, जिसमें सिर्फ नौटंकी बची है। उन्होंने कहा कि ​”हमारे समय में हम जैसे लोग सीनियर नेताओं को सम्मान से कुर्सी देते थे, लेकिन आज पुरानी भाजपा के कार्यकर्ता घुटन महसूस कर रहे हैं। जब एक सीनियर विधायक की बात अधिकारी-कर्मचारी नहीं सुन रहे और उन्हें दबाया जा रहा है, तो आम कार्यकर्ता का क्या हाल होगा, समझा जा सकता है।”



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