महंत बोले-भगवान शरणागत की रक्षा स्वयं करते:कथा में द्रौपदी चीरहरण का प्रसंग; साकेत महोत्सव में आज श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

महंत बोले-भगवान शरणागत की रक्षा स्वयं करते:कथा में द्रौपदी चीरहरण का प्रसंग; साकेत महोत्सव में आज श्रीकृष्ण जन्मोत्सव




टीकमगढ़ के प्रसिद्ध धजरई हनुमान मंदिर में सात दिवसीय साकेत महोत्सव जारी है। सोमवार देर रात तक चली कथा में निर्मोही अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष और धीर समीर वृंदावन के महंत मदनमोहन दास महाराज ने शरणागति की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि भगवान अपने शरणागत की हर परिस्थिति में रक्षा करते हैं। जब मनुष्य सांसारिक आशाओं को त्यागकर पूरी तरह से प्रभु के आश्रित हो जाता है, तब भगवान बिना किसी देरी के अपने भक्त की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। कथा में द्रौपदी चीरहरण का प्रसंग सुनाया कथा के दौरान महाराज श्री ने महाभारत के द्रौपदी चीरहरण का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि भरी सभा में जब भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य और राजा धृतराष्ट्र जैसे महारथी मौन रहे और द्रौपदी की रक्षा किसी ने नहीं की, तब द्रौपदी ने अपनी पूरी शक्ति और संसार की आस छोड़कर दोनों हाथ उठाकर द्वारकाधीश को पुकारा। भक्त की इस अनन्य शरणागति को देखकर भगवान ने तुरंत वस्त्रावतार धारण किया। प्रभु ने चीर बढ़ाकर द्रौपदी की लज्जा और मान की रक्षा की, जिससे पंडाल में मौजूद कई श्रद्धालुओं की आंखें सजल हो उठीं। महोत्सव में आज श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा बुंदेलखंड पीठाधीश्वर महंत सीताराम दास महाराज ने बताया कि साकेत महोत्सव अब अपने आनंदमयी पड़ाव पर पहुंच रहा है। महोत्सव में आज श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर विशेष झांकियां सजाई जाएंगी और नंदोत्सव के दौरान खिलौने व माखन-मिश्री का प्रसाद बांटा जाएगा। महोत्सव में आध्यात्मिक रसधार के साथ-साथ प्रसाद की भी अनवरत व्यवस्था जारी है। प्रतिदिन कथा विश्राम के बाद सभी श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें हजारों भक्त प्रसादी ग्रहण कर रहे हैं।



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