लग्जरी पर्यटन, प्राइवेसी ही करेंसी:अब बेहतरीन ठिकाने नहीं, ‘अनुभव’ खरीदे जा रहे; पुराने वाइन टैंकों में स्टे, दार्शनिक विमर्श पसंद कर रहे रईस सैलानी
अल्ट्रा रिच यानी रईस ट्रैवलिंग का तरीका बदल रहे हैं। ये वर्ग केवल सैर-सपाटे के लिए नहीं निकल रहा, बल्कि ऐसे अनुभव ‘डिजाइन’ कर रहे, जहां आम सैलानियों की परछाई तक नहीं पहुंचती। चाहे वह ग्रीस की किसी पुरानी वाइनरी के टैंकों में रात गुजारने का अनोखा अनुभव हो, बच्चे के लिए पूरा नेशनल स्टेडियम बुक करना। लग्जरी ट्रैवल मार्केट जो 2025 में 163 लाख करोड़ रुपए का है, 2033 तक सालाना 3.4% बढ़ते हुए 194 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है। लग्जरी ट्रैवल कंपनी ‘एविसा वेकेशंस’ की सिला डाली कहती हैं, ‘यात्री अब ऐसी जगह कर रहे हैं जो उन्हें आस-पास के माहौल से जुड़ा हुआ महसूस कराती हैं। अब लग्जरी का मतलब केवल महंगा कमरा नहीं, बल्कि एक ऐसा एकांत और खास अनुभव है जहां आम पर्यटकों की पहुंच न हो। रईसों के लिए अब ‘लग्जरी’ का मतलब वैसी चीजें हैं जो किसी और के पास न हों असंभव को संभव बना रहे डेस्टिनेशन एल्केमिस्ट ‘डेस्टिनेशन एल्केमिस्ट’ या हाई-एंड कंसीयर्ज सर्विसेज का शुल्क 2.8 लाख रुपए से शुरू होता है। ये जादूगर क्लाइंट की वो सनक पूरा करते हैं, जिन्हें पैसा भी मुश्किल से खरीद पाता है। मसलन, क्लाइंट के लिए मानसून में धुली समुद्री रेत को रातों-रात रिप्लेस करवाना। होटल के कमरों से विशिष्ट रंग हटवा देना। जन्मदिन पर नेशनल स्टेडियम बुक करना और दिग्गज फुटबॉलरों के साथ मैच का आयोजन। ‘एक्सक्लूसिविटी’ का नया पता – भीड़ से कोसों दूर अल्ट्रा-रिच ऐसी जगह चुन रहे हैं जो नक्शे पर तो हैं, पर पहुंच में नहीं। पोर्टोफिनो (इटली) के विला से लेकर सेशेल्स के 36 लाख रुपए प्रति रात वाले विला तक, मांग सिर्फ एकांत की है। बहामास के बुल्गारी रिसॉर्ट और मालदीव के रोजवुड इसी प्राइवेसी के नए मानक सेट कर रहे हैं। तकनीक ने अमीरों को ‘लोकेशन इंडिपेंडेंट’ बना दिया है। अब वे डिजिटल वर्क के जरिए दुनिया के किसी भी कोने से चला सकते हैं। पर्यटन की दुनिया में अब बौद्धिक अनुभव बेचे जा रहे ग्रीस के पेलोपोनीज में लोग अब केवल बीच पर नहीं जाते, बल्कि प्राचीन जंगलों में हाइकिंग और ‘मन्ना’ जैसे शांत ठिकानों में वक्त बिताते हैं। पश्चिमी पेलोपोनीज में 1920 के पुराने वाइन टैंकों को होटल में बदलकर ‘बौद्धिक अनुभव’ बेचा जा रहा है। एथेंस के ‘एंथोलॉजी’ जैसे होटलों में एंथोलॉजी डायलॉग्स जैसे सत्र आयोजित कर रहे हैं, जहां इतिहासकारों, दार्शनिकों के साथ चर्चा करते हैं।
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