लहर-लहर:संभव है आपको राजनीति में दिलचस्पी न हो, लेकिन राजनीति को आपमें है
बहुत-से लोग, खास तौर पर चालीस-पचास साल के, नौकरीपेशा लोग और हमारी उम्र के लोग भी मुझसे कहते हैं, ‘सर, मुझे राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है।’ मैं उनसे कहता हूं, ‘आपको राजनीति में दिलचस्पी नहीं है?’ कहना तो ऐसा हुआ जैसे कोई कहे, ‘मुझे प्रदूषण में कोई दिलचस्पी नहीं है।’ अरे भाई, आपको प्रदूषण में दिलचस्पी हो या न हो, आप उसी हवा में सांस ले रहे हैं, उसी माहौल में जी रहे हैं, वही आपके खाने-पीने में घुला हुआ है। यह दिलचस्पी का सवाल ही नहीं है। ठीक उसी तरह, अगर आपको राजनीति में दिलचस्पी नहीं है, तो कोई बात नहीं, लेकिन राजनीति को आपमें पूरी दिलचस्पी है। वह हर रोज आपकी जिंदगी बदल रही है। आपके रोजगार पर, जेब पर, आजादी पर, आपके बच्चों के भविष्य पर उसका असर पड़ रहा है। प्रदूषण की तरह राजनीति भी आपके दरवाजे पर दस्तक देकर नहीं आती। वह आपकी सांसों में उतरती है, आपके खाने में पहुंचती है, आपके रोजमर्रा के जीवन में शामिल हो जाती है। आप चाहें या न चाहें, उससे बच नहीं सकते। इसलिए यह कहना कि ‘मुझे राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है’, मुझे थोड़ा अजीब लगता है। मैं यह नहीं कह रहा कि हर आदमी को नेता बन जाना चाहिए या चुनाव लड़ना चाहिए, लेकिन जिस समाज में आप रहते हैं, जिस मुल्क में आपकी जिंदगी गुजरती है, जिस दुनिया का आप हिस्सा हैं, उसके बारे में आपको मालूम तो होना चाहिए। यह समझना चाहिए कि वह किस दिशा में जा रही है- सही दिशा में या गलत दिशा में। भारतीय राजनीति को सिर्फ नेताओं के भाषणों से मत समझिए, उसे अपने आसपास की जिंदगी में देखिए। आपकी सड़क कैसी है, आपके बच्चे किस स्कूल में पढ़ते हैं, अस्पताल कैसा है, रोजगार के अवसर कितने हैं, आपकी आजादी कितनी सुरक्षित है- इन सबका रिश्ता राजनीति से है। इसलिए यह कहना कि ‘मुझे राजनीति से कोई मतलब नहीं’, अपने ही जीवन से आंखें मूंद लेने जैसा है। लोकतंत्र में राजनीति जनता की मालिक नहीं, उसकी जवाबदेह सेवक होनी चाहिए। किसी भी सरकार से सवाल पूछना विरोध नहीं, नागरिक का अधिकार है। आखिर में, राजनीति उतनी ही अच्छी होगी, जितने जागरूक उसके नागरिक होंगे। फिर फैसला आपका है। आप क्या सोचते हैं, क्या करते हैं और अपनी हैसियत के मुताबिक क्या योगदान दे सकते हैं- यह भी आपका ही चुनाव है। क्योंकि अगर समाज गलत दिशा में जाएगा, तो उसका असर आप पर भी पड़ेगा। और अगर सही दिशा में जाएगा, तब भी उसका फायदा आपको ही मिलेगा। मुझे छात्रों से बातचीत करना हमेशा अच्छा लगता है। सच कहूं तो उनसे जितना मैं बोलता हूं, उससे ज्यादा उनसे सीखता हूं। खास तौर पर उनके सवालों से। अच्छे सवाल किसी भी समाज की जिंदगी की निशानी होते हैं। अक्सर लोग कहते हैं कि छात्रों को राजनीति से दूर रहना चाहिए। मैं पूछता हूं- क्यों? राजनीति अगर आपकी फीस तय करती है, आपकी शिक्षा की दिशा तय करती है, आपके रोजगार का भविष्य तय करती है, तो आप उससे कैसे बेखबर रह सकते हैं? हां, मैं यह जरूर कहूंगा कि छात्र राजनीति का मतलब किसी पार्टी का झंडा उठाना नहीं है। उसका मतलब है सवाल पूछना, बहस करना, अपने समाज को समझना और सही-गलत में फर्क करना सीखना। यूनिवर्सिटी सिर्फ डिग्री देने की जगह नहीं होती; वह लोकतंत्र की पहली पाठशाला होती है। अगर वहां सवाल खामोश हो जाएं, तो समझिए समाज का भविष्य भी खामोश हो जाएगा। हमारे जमाने में न मल्टीप्लेक्स थे, न मॉल। फिल्म देखने जाना अपने-आप में एक छोटा-सा त्योहार होता था। दो रुपए का टिकट भी सोच-समझकर खरीदना पड़ता था। लेकिन मुझे फिल्म खत्म होने के बाद सबसे ज्यादा इंतजार ट्रेलरों का रहता था। मुझे लगता था कि एक टिकट के पैसे में दूसरी फिल्मों की झलक भी मुफ्त मिल गई- इससे बड़ा बोनस क्या हो सकता है! आज मैं जब आप नौजवानों को देखता हूं, तो मुझे लगता है कि वो सब भी आने वाले भारत के ट्रेलर हैं। कल का भारत कैसा होगा, उसकी पहली झलक आपकी सोच, सवालों और सपनों में दिखाई देती है। ये देश कभी असंतुलित नहीं हो सकता। ऊंची-नीची लहरें आती रहती हैं, हमारी कश्ती डगमगाती जरूर है, डूब नहीं सकती। हिन्दुस्तान ने कई जमाने देखे हैं, लेकिन वो चलता रहा। यह हमारी खुशकिस्मती है कि हम एक लोकतांत्रिक देश में पैदा हुए हैं। इस लोकतांत्रिक व्यवस्था से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। मुझे सचमुच लगता है कि बीस और तीस की उम्र के लोग कुछ बातें मुझसे बेहतर समझते हैं। देशप्रेम का मतलब ये नहीं कि सिर्फ नारे लगाते रहो और देश के लिए कुछ भी न करो। चाहे कोई कुछ भी कहे, मैं एक ही बात जानता हूं कि एक हिन्दुस्तानी अपने को तबाह नहीं कर सकता। वो वही करेगा, जो इस देश के लिए अच्छा है। हम हिन्दुस्तानियों में ये खूबी है कि हममें टॉलरेंस है। हमारी खूबी ये है कि हम हमेशा हर तरह की विचारधारा को जगह देते रहे और इसीलिए हमारा ‘इंटेलेक्चुअल मसल’ डेवलप हुआ है, इसीलिए हमारे यहां बेहतर माइंड पैदा हुए हैं, इसीलिए हमने प्रोग्रेस की है, इसीलिए हमारे पास डेमोक्रेसी है। (संपादन और समन्वय- अरविंद मण्डलोई)
Source link

