श्रीनाथजी मंदिर में फूलों और पत्तियों से सजाया डोल:प्रभु को बैठा के झुलाया, ढोल बजाकर भजन गाए, देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु

श्रीनाथजी मंदिर में फूलों और पत्तियों से सजाया डोल:प्रभु को बैठा के झुलाया, ढोल बजाकर भजन गाए, देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु




नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर में अधिक मास के तहत शुक्रवार को ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष पंचमी पर “अद्भुत डोल बनी” मनोरथ संपन्न हुआ। तिलकायत महाराज की आज्ञा तथा विशाल बावा और लाल बावा की उपस्थिति में श्रीजी प्रभु एवं श्री लाडले लाल प्रभु के सम्मुख विशेष मनोरथ सिद्ध किए गए। राजभोग दर्शन के दौरान सुसज्जित डोल में श्री लाडले लाल प्रभु और श्री मदन मोहनलाल प्रभु को विराजित कर डोलोत्सव का भाव प्रकट किया गया। पुष्पों और पत्तियों से सजाया गया डोल राजभोग दर्शन में डोल तिबारी में चंदन, कदंब, मादड़ी और आम्र पत्तियों से कलात्मक डोल तैयार किया गया। डोल को गुलाब, चमेली, मोगरा और कमल के पुष्पों से सजाकर निकुंज स्वरूप दिया गया। इसी डोल में श्री लाडले लाल प्रभु एवं श्री मदन मोहनलाल प्रभु को विराजित किया गया। तिलकायत परिवार ने झुलाया डोल मनोरथ के दौरान तिलकायत परिवार ने प्रभु को डोल झुलाया। वहीं लाल बावा ने ब्रजवासियों के साथ रसिया गान किया। इस दौरान ढफ और ढोल बजाकर प्रभु को लाड लड़ाए गए। वल्लभ कुल की ओर से वैष्णव जनों के साथ फूलों की फाग भी खेली गई। उष्णकालीन विशेष श्रृंगार किया गया उष्ण काल के अनुरूप प्रभु को गुलाबी मलमल की धोती-पटका धारण कराया गया। इसके साथ छज्जेदार गुलाबी पाग और श्वेत मोर चंद्रिका से श्रृंगार किया गया। मोती के आभूषणों के साथ शीतल स्वरूप में प्रभु के दर्शन कराए गए। देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु मनोरथ और विशेष दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु नाथद्वारा पहुंचे। मंदिर परिसर में वैष्णव जनों की मौजूदगी रही और पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्ति भाव का वातावरण बना रहा।



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