हरियाणा में तेंदुए ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ा:कुत्तों से फैलने वाली गंभीर बीमारी के लक्षण मिले; कलेसर जंगल में एक और लैपर्ड बीमार दिख रहा
यमुनानगर के कालेसर जंगल में एक तेंदुए की मौत ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। सात माह के नर शावक को 29 जून को सढ़ौरा क्षेत्र से गंभीर हालत में रेस्क्यू किया गया था, लेकिन इलाज के लिए ले जाते समय उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम में उसके हार्ट, लीवर और आंतों को गंभीर नुकसान पहुंचा मिला। शुरुआती जांच में कुत्तों से फैलने वाली कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी के लक्षण सामने आए हैं। इसी बीच कालेसर जंगल में एक और तेंदुआ भी बीमार हालत में दिखाई देने से वन विभाग अलर्ट हो गया है। आवारा कुत्तों का शिकार करते हैं तेंदुए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तेंदुए का हार्ट, लीवर और इंटरस्टाइन (आंतें) गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त मिले। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार उसमें कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) संक्रमण के लक्षण पाए गए हैं। यह बीमारी मुख्य रूप से कुत्तों में होती है और संक्रमित कुत्ते का शिकार करने या उसका मांस खाने से तेंदुओं तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि कालेसर क्षेत्र में तेंदुए अक्सर जंगल के किनारे घूमने वाले आवारा कुत्तों का शिकार करते हैं। यदि कोई कुत्ता पहले से संक्रमित हो तो वायरस तेंदुए तक पहुंच सकता है। हालांकि इस बीमारी के एक तेंदुए से दूसरे तेंदुए में फैलने की आशंका काफी कम रहती है, क्योंकि तेंदुए अकेले रहने वाले वन्यजीव हैं और सामान्य तौर पर एक-दूसरे के संपर्क में नहीं आते। वे केवल प्रजनन के समय ही साथ आते हैं। तीन डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमॉर्टम किया गंभीर हालत में मिले तेंदुए को इलाज के लिए डॉक्टर के पास ले जाया गया। इसी दौरान जानवर की मौत हो गई। तीन डॉक्टरों डॉ. राहुल छछरौली, डॉ. विक्रांत साढौरा व डॉ. प्रशांत तिवारी ने पोस्टमॉर्टम किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तेंदुए का लीवर, हार्ट बुरी तरह प्रभावित मिले। आंतों में ब्लीडिंग और सांस की नली में भी कई तरह के विकार मिले वन्य प्राणी विभाग की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि दो दिन पहले ही एक और लैपर्ड भी आबादी क्षेत्र में देखा गया। जो काफी सुस्त व बीमार नजर आ रहा था। रामपुर खादर के किसान ने उसकी वीडियो बनाई थी। करीब 25 हजार एकड़ में फैले कलेसर नेशनल पार्क और सेंचुरी एरिया में 50 तेंदुए होने का अनुमान है। सरकार ने 3 साल पहले विधानसभा में यह संख्या 23 बताई थी। पोस्टमॉर्टम के बाद बनसंतूर हाथी पुनर्वास केंद्र के परिसर में तेंदुए के शरीर को जलाने के बाद अवशेष जमीन में दफना दिए गए। करीब सात माह का था शावक वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिस शावक की मौत हुई, उसकी उम्र करीब सात माह थी। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि जंगल के आसपास आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब वन्यजीवों के लिए भी खतरा बन रही है। ऐसे में कुत्तों में संक्रमण की रोकथाम और निगरानी जरूरी है, ताकि यह बीमारी अन्य वन्यजीवों तक न पहुंचे। अब सिलसिलेवार जानिये….क्या है पूरा मामला ग्रामीणों ने ही विभाग को सूचना दी
कलेसर जंगल के सेंचुरी एरिया के पास गांव शहजाद वाला है। वहीं के कुछ ग्रामीणों ने जंगल के कोने में तेंदुए को तड़पता देखा। उसके बाद वन्य प्राणी विभाग को सूचना दी। कई दिनों से विभाग का गश्ती दल इस एरिया में नहीं आया था। अनुमान है कि तेंदुआ यहां कई दिन से तड़प रहा था।
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