105 किलो वजन लेकर कांवर यात्रा पर अमर कुमार:सुल्तानगंज से सुंदरीनाथ धाम तक पैदल यात्रा, पूर्णिया में लोगों ने किया स्वागत; बोले- सब बाबा की कृपा है
सावन माह में अररिया के अमर कुमार ने एक विशेष कांवर यात्रा शुरू की है। सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल लेकर अररिया जिले के प्रसिद्ध बाबा सुंदरीनाथ धाम (सुंदरी मठ) तक पैदल यात्रा कर रहे हैं। इस यात्रा में वे अपने साथ 105 किलोग्राम का कांवड़ लेकर चल रहे हैं। कंधे पर 105 किलो का भार, चेहरे पर मुस्कान अमर कुमार ने अपनी यात्रा का आधा सफर पूरा कर लिया है। उनकी यह यात्रा शिवभक्ति के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती है। रविवार को अमर पूर्णिया पहुंचे, जहां लोगों ने उसका स्वागत किया है। अमर ने बताया कि हम सुल्तानगंज से जल उठाकर आ रहे हैं। हमारे पास 80 लीटर गंगाजल है और कुल वजन 105 किलो है। सुल्तानगंज से यहां तक पहुंचने में 15 दिन लगे हैं। अररिया जिला के कुर्साकांटा के परसा कटाहा स्थित सुंदरीनाथ धाम पहुंचने में अभी 12 दिन और लगेंगे। मौसम के मुताबिक तय होता है सफर सफर की कठिनाइयों पर बात करते हुए अमर कुमार ने बताया कि वे प्रतिदिन मौसम के मुताबिक और शारीरिक क्षमता के अनुसार 7 से 8 किलोमीटर का सफर तय करते हैं। यात्रा के दौरान उनके साथ 3 से 4 साथियों की टोली भी बदलती-रहती है जो इस कठिन यात्रा में उनका संबल बनती है। ‘कोई कठिनाई नहीं, सब बाबा की कृपा है’ भीषण गर्मी, पसीना और इतने भारी वजन के बावजूद अमर कुमार के चेहरे पर थकान के बजाय असीम शांति और भक्ति का भाव है। जब उनसे रास्ते में मिलने वाली सुविधाओं, प्रशासन की सहायता और कठिनाइयों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही सहजता से मुस्कुराते हुए कहा कि किसी तरह की कोई कठिनाई नहीं है, सब अच्छा चल रहा है। प्रशासन का सहयोग भी ठीक है। बस दिल में एक मन्नत है, जो बाबा भोलेनाथ से मांगी है और उन्हीं की कृपा से यह यात्रा हंसी-खुशी पूरी हो रही है। आस्था और अंतरराष्ट्रीय पहचान का केंद्र: सुंदरीनाथ धाम अररिया जिले के कुर्साकांटा स्थित बाबा सुंदरीनाथ धाम (सुंदरी मठ) भारत और नेपाल दोनों देशों के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने भी इस स्थल पर पूजा-अर्चना की थी। सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का जल लेकर सुंदरीनाथ धाम जाने वाले कांवरियों की निष्ठा बिहार की इस पावन परंपरा को और भी खास बनाती है।
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