13-year-old Agam Gulecha of Pali will take initiation in Palitana, Gujarat on April 23, 2026, and will become a Jain monk, April 7, 2026

13-year-old Agam Gulecha of Pali will take initiation in Palitana, Gujarat on April 23, 2026, and will become a Jain monk, April 7, 2026


मूल रूप से पाली का रहने वाला आगम जैन 23 अप्रैल को गुजरात के पालीताणा में जैन दीक्षा ग्रहण करेगा।

अक्सर 13 साल की उम्र में बच्चे वीडियो गेम्स और स्कूल की पढ़ाई में उलझे होते हैं, लेकिन टेक्सटाइल कारोबारी के बेटे आगम जैन ने एक अलग ही रास्ता चुना है। महज 7 साल की उम्र में सांसारिक सुख त्यागने का फैसला करने वाला यह किशोर अब 23 अप्रैल को गुजरात के पा

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पाली में हुए कार्यक्रम की PHOTOS…

आगम के पाली पहुंचने पर सम्मान में वरघोड़ा निकाला गया था। इसमें परिवार और समाज के लोग भी मौजूद थे।

6 अप्रैल को पाली में कार्यक्रम हुआ था, जिसमें आगम जैन और उसके परिवार वाले जमकर झूमे थे।

आगम जैन के पिता दिलीप जैन मूल रूप से पाली के रहने वाले हैं। कारोबार उनका सूरत (गुजरात) में है।

आगम को दीक्षा के लिए बड़ी मुश्किल से अनुमति मिली। वे अपने पिता से जिद करते रहे थे।

पिता टेक्सटाइल कारोबारी, 10 करोड़ टर्नओवर आगम के पिता दिलीप जैन का सूरत के वेसू में ‘डीके टेक्सटाइल इंडस्ट्री’ के नाम से बड़ा कारोबार है, जिसका सालाना टर्नओवर 9 से 10 करोड़ रुपए है। इस परिवार का लाडला अब भौतिक सुख-सुविधाओं को पीछे छोड़ संयम के पथ पर अग्रसर है।

6 साल की उम्र में बदला मन वैराग्य की यह कहानी तब शुरू हुई जब आगम सिर्फ 6 साल का था। पिता दिलीप जैन बताते हैं- सूरत में जैन संत रत्नचंद्र सुरीश्वर महाराज के प्रवचन चल रहे थे। आगम वहां गया और उन बातों से इतना प्रभावित हुआ कि उसने नश्वर संसार और आत्मा के कल्याण की बातें करनी शुरू कर दी।

अपने छोटे भाई मानविक के साथ आगम जैन। सूरत में तीन दिनों तक दीक्षा कार्यक्रम होगा।

48 दिन जिया साधुओं जैसा जीवन जब आगम ने दीक्षा की जिद पकड़ी, तो परिवार ने उसकी परीक्षा लेनी चाही। जैन संतों के परामर्श पर उसे ‘उद्यापन तप’ करने को कहा गया। 8 साल की उम्र में आगम ने 48 दिनों तक कठिन तपस्या की। इस दौरान उसने कठोर सर्दी-गर्मी में नंगे पैर यात्रा की। सिर्फ गर्म पानी का सेवन किया। साधुओं की तरह सुबह जल्दी उठना और केश लोचन (बाल उखाड़ना) करवाया। जब वह इस कठिन परीक्षा में सफल रहा, तब परिवार को यकीन हुआ कि यह महज बचपन की जिद नहीं, बल्कि अटूट संकल्प है।

5 साल गुरुकुल में पढ़ाई, 4500 KM की पैदल यात्रा चौथी कक्षा के बाद आगम ने स्कूल छोड़ दिया और पिछले 5 साल जैन संतों के सान्निध्य में बिताए। इस दौरान उसने 11 ओली तप और कई जटिल ग्रंथों (आगम, कर्म ग्रंथ, भाष्य) का अध्ययन किया। उसने संतों के साथ मुंबई, पालीताणा (गुजरात), सूरत और गिरनार (जूनागढ़, गुजरात) जैसे क्षेत्रों में करीब 4,500 किलोमीटर की पैदल यात्रा (विहार) भी पूरी की है।

असली सुख भगवान महावीर के बताए मार्ग में आगम का कहना है- संसार के सारे रिश्ते नश्वर हैं। असली सुख वैराग्य और भगवान महावीर के बताए मार्ग में है। माता-पिता और भाई की याद आना सांसारिक मोह है, जिससे ऊपर उठना ही मोक्ष का मार्ग है।

23 अप्रैल को पालीताणा में महाभिनिष्क्रमण दीक्षा का भव्य कार्यक्रम गुजरात के पावन धाम पालीताणा में आयोजित होगा।

  • 21 अप्रैल : दीक्षा महोत्सव की शुरुआत।
  • 22 अप्रैल: वर्षीदान वरघोड़ा (भव्य जुलूस) और परिवार से विदाई।
  • 23 अप्रैल: संत रत्नचंद्र सूरीश्वर महाराज के सानिध्य में दीक्षा ग्रहण।



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