हाईकोर्ट ने 124 दिन की देरी माफ करने से इनकार:कहा- सरकारी अफसरों के पास अदालती आदेशों पर कार्रवाई का असीमित समय नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार को 124 दिन की देरी के लिए राहत देने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने अदालती आदेश के खिलाफ अपील दाखिल करने में हुई इस देरी के लिए माफी की अर्जी खारिज कर दी। पीठ ने टिप्पणी की कि सरकारी अधिकारियों और विधि अधिकारियों को परिसीमा की समय-सीमा की अच्छी जानकारी होती है, फिर भी वे मामलों को ऐसे निपटाते हैं जैसे उनके पास कार्रवाई के लिए असीमित समय हो। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने सेवानिवृत्त सहायक निरीक्षक, सिविल पुलिस सोमराज सिंह के मामले की सुनवाई के बाद पारित किया। इससे पहले, एकल पीठ ने 19 सितंबर 2024 को सोमराज सिंह से वसूली गई 83,562 रुपये की रकम वापस करने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने अपनी अपील में बताया कि उन्हें आदेश की जानकारी 21 सितंबर को मिली थी। इसके बाद विधिक राय लेने, शासन को प्रस्ताव भेजने और अपील की अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू हुई। विधि एवं न्याय विभाग से अनुमति मिलने के बाद 20 फरवरी 2025 को विशेष अपील दाखिल की गई। हालांकि, न्यायालय ने सरकार द्वारा बताए गए इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। पीठ ने कहा कि पूरे घटनाक्रम से प्रशासनिक उदासीनता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। अधिकारियों ने समय-सीमा समाप्त होने के करीब पहुंचने तक इंतजार किया और उसके बाद ही अपील की प्रक्रिया शुरू की। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी तंत्र की लापरवाही के कारण हुई देरी को हर मामले में माफ नहीं किया जा सकता है।
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