CJI Suryakant Statement | Judiciary Protects Indian Constitution Values
नई दिल्ली3 घंटे पहले
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CJI सूर्यकांत ने गुरुवार को डीडी न्यूज इंचरव्यू दिया था।
CJI सूर्यकांत बोले संविधान देश की सबसे बड़ी ताकत है। इसकी मूल संरचना की रक्षा करना और उसे मजबूत बनाए रखना न्यायपालिका की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है।
न्यायपालिका संविधान की संरक्षक है। यह किसी पक्ष या विपक्ष के लिए फैसला नहीं करती, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के आधार पर निर्णय लेती है।
उन्होंने आगे कहा कि देश में लंबित मामलों को लेकर न्यायपालिका ने कदम उठाने का फैसला किया है। इसके लिए केस मैनेजमेंट की एक आसान योजना बनाई गई है, जिसे अदालत में डॉकेट मैनेजमेंट कहा जाता है। उन्होंने यह बात डीडी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कही।
CJI ने कहा- संविधान की मूल संरचना नहीं बदलेगी
- देश की परिस्थितियों में बदलाव के बावजूद संविधान की मूल संरचना वही रहेगी। इसे बदला नहीं जा सकता।
- समाज के कमजोर और वंचित लोगों के लिए अदालतों का हस्तक्षेप उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है। देश की बड़ी आबादी सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ी है।
- ऐसे लोग अपने कानूनी और संवैधानिक अधिकारों के लिए आसानी से अदालत का रुख नहीं कर पाते। ऐसे लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए जनहित याचिका और सुओ मोटो मामले जरूरी साधन हैं।
- इन अधिकारों की रक्षा करना न्यायपालिका की संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन लोग इस जिम्मेदारी को न्यायिक सक्रियता कहते हैं।
24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे
CJI सूर्यकांत को 24 मई 2019 को भारत के सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया था। उन्होंने 24 नवंबर 2025 को भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी।
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बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के छात्रों का नामांकन रोकने का आदेश वापस ले लिया है। इन छात्रों पर CJI जस्टिस सूर्यकांत के खिलाफ अभियान चलाने का आरोप था।
BCI ने गुरुवार को कहा कि ताजा रिपोर्ट के मुताबिक NALSAR के 2026 में पास होने वाले छात्रों में से ज्यादातर निर्दोष हैं। ये छात्र इस मुहिम में शामिल होने के इच्छुक नहीं थे। पढ़ें पूरी खबर…

