इटावा-मैनपुरी मार्ग पर शव रखकर जाम का मामला:35 लोगों पर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज, वीडियो फोटो के आधार पर होगी कार्रवाई
इटावा के इकदिल थाना क्षेत्र में दूध व्यापारी रंजीत की संदिग्ध मौत के बाद सड़क जाम कर प्रदर्शन करने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। सिविल लाइंस थाना पुलिस ने 35 लोगों के खिलाफ गैरकानूनी जमावड़ा, सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिसकर्मियों से अभद्रता करने और उपद्रव फैलाने समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब फोटो और वीडियो के आधार पर प्रदर्शनकारियों की पहचान करने में जुटी है। जानकारी के मुताबिक, इकदिल थाना क्षेत्र के नगला बर गांव निवासी दूध व्यापारी रंजीत का शव फंदे पर लटका मिला था। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने हत्या की आशंका जताते हुए मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। आरोप है कि कार्रवाई न होने से नाराज लोग बुधवार सुबह दो ट्रैक्टर-ट्रालियों में शव लेकर इटावा-मैनपुरी मार्ग पर पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने डीएम कार्यालय के पास मैनपुरी फाटक अंडरपास के निकट तिराहे पर शव रखकर सड़क जाम कर दी। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और मुख्य मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया। पुलिस से धक्का-मुक्की और अभद्रता का आरोप सिविल लाइंस थाना प्रभारी निरीक्षक कृष्ण कुमार मिश्र ने बताया कि बुधवार सुबह करीब 8:45 बजे वह अपनी टीम के साथ कोर्ट जा रहे थे। इसी दौरान सूचना मिली कि कुछ लोग शव रखकर जाम लगाए हुए हैं। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाने का प्रयास किया गया। पुलिस का आरोप है कि समझाने के दौरान भीड़ उग्र हो गई और महिलाओं को आगे कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज की, धक्का-मुक्की की और कुछ अधिकारियों की वर्दी पकड़कर खींची। तीन घंटे तक बाधित रहा मुख्य मार्ग हालात बिगड़ते देख उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई, जिसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। मौके पर कोतवाली, फ्रेंड्स कॉलोनी और महिला थाना पुलिस के साथ बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मी भी तैनात की गईं। पुलिस के मुताबिक, भीड़ में शामिल 5 से 6 लोग लगातार लोगों को उकसा रहे थे, जिसके चलते करीब तीन घंटे तक इटावा-मैनपुरी मार्ग बाधित रहा। इस दौरान राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बाद में सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र बहादुर, सीओ सिटी अभय नारायण राय और सदर एसडीएम विक्रम राघव भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों की समझाइश और सख्ती के बाद जाम खुलवाया जा सका। वीडियो और फोटो से होगी पहचान थाना प्रभारी केके मिश्रा ने बताया कि घटना के दौरान के फोटो और वीडियो सुरक्षित कर लिए गए हैं। उनकी मदद से उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों की ओर से पहले कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई थी और सड़क जाम कर सरकारी कार्य में बाधा डाली गई। मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। इनमें गैरकानूनी जमावड़ा, लोक सेवक को धमकाना, रास्ता रोकना, सरकारी कार्य में बाधा डालना, शांति भंग करने के उद्देश्य से अपमान करना और बल प्रयोग जैसी धाराएं शामिल हैं।
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