कांवड़ यात्रा में नजर आया 30 साल पुराना ट्रेक्टर:जेवर के ऋषभ ने स्पेशली गंगाजल लाने के लिए कराया मोडिफाई
कांवड़ यात्रा में शिवभक्ति के अलग अलग नजारे दिख रहे हैं। भोलेबाबा के भक्त सबसे अलग दिखने के लिए नए तरीकों से अपनी कांवड़ सजाकर चल रहे हैं। कांधे पर कांवड़ के साथ बड़ी कांवड़ें भी हाईवे पर खूब दिख रही हैं। मेरठ में एनएच 58 के अलावा अब शहर के अंदर भी कांवड़ियों का हुजूम उमड़ने लगा है। दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम के कांवड़िए अब जल लेकर बढ़ते जा रहे हैं। इसी बीच जेवर के ऋषभ भी ट्रेक्टर पर जल लाते दिखाई दिए। रोचक बात यह कि ऋषभ ने ट्रेक्टर पर अपनी फोटो लगाई है। जब वो ट्रेक्टर की ड्राइविंग सीट पर बैठकर उसे चलाते हैं तो उसी अंदाज की उनकी फोटो ट्रेक्टर पर नजर आती है। इसे देखकर लोग खुद रुककर उनके साथ सेल्फी लेते हैं।
दैनिक भास्कर ने ऋषभ से बातचीत की तो उन्होंने अपनी ट्रेक्टर कांवड़ के बारे में बताया.. अलग करने की इच्छा से निकला आइडिया जेवर के ऋषभ मूलरूप से किसान हैं। कहते हैं कि सालों से कांवड़ लाने की इच्छा मन में थी। सालभर का एक ही तो त्योहार है जिसे हम शिवभक्त अपने बाबा के लिए अच्छे से मनाते हैं। ये मेरी तीसरी कांवड़ है। पहली दो कांवड़ तो सामान्य रूप से लाया था। लेकिन जब रास्ते में देखा कि बाबा के भक्त तो बहुत रोचक अंदाज में कांवड़ लाते हैं। एक दूसरे का मनोरंजन करते हुए चलते हैं, तो मैंने सोचा कि 2026 की यात्रा में हम भी कुछ अलग करेंगे। 30 साल पुराने ट्रेक्टर को दिया नया लुक हम किसान हैं और किसान के पास केवल हल, ट्रेक्टर ही होता है। वो ज्यादा खर्चा नहीं कर सकता। मेरे पास 1996 का ये ट्रेक्टर रखा था। घर पर रखे इस पुराने ट्रेक्टर को ही मैंने इस बार कांवड़ यात्रा में लाने का मन बनाया था। फरवरी, मार्च से ही इसकी तैयारी शुरू कर दी थी। लगभग एक महीने में ये ट्रेक्टर मोडिफाई कराया। बंद पड़े ट्रेक्टर को पूरा ठीक किया फिर तेलपानी करके इसको चलाया। ताकि यात्रा सुगमता से चलती रहे। सेल्फी लेने के लिए लगती है भीड़
ट्रेक्टर को पेंट किया। अब सवाल आया कि इसमें रोचक क्या करुं तो मैंने अपना ही फोटो ट्रेक्टर पर लगा दिया। जिस स्टाइल में बैठकर मैं ट्रेक्टर चलाऊंगा उन्हीं कपड़ों, स्टाइलिश मूंछों वाली फोटो को तैयार कराकर लगवा दिया। ताकि लोग जब फोटो वाले इंसान को लाइव देखेंगे तो रुकेंगे। ये हो भी रहा है। हरिद्वार से यहां मेरठ तक हम आ गए। जहां भी गुजरते हैं वहां लोग हमें देखकर रुकते हैं। हमारे साथ सेल्फी लेते हैं। ट्रेक्टर की फोटो लेकर रील बनाते हैं। इसी में मनोरंजन भी हो रहा है, आसानी से पूरी यात्रा हो रही है। डेढ़ लाख रुपयों में हुआ मोडिफाई
ऋषभ के साथ उनके 5 दोस्त भी इस यात्रा में साथ हैं। वो दोस्त अन्य व्यवस्थाएं संभालते हैं जबकि ऋषभ ट्रेक्टर चलाते हैं। इस ट्रेक्टर को तैयार कराने में पूरा डेढ़ लाख रुपए का खर्चा आया। बाकी यात्रा के अन्य खर्चे भी हैं जो सब मिलकर उठा रहे हैं। ऋषभ कहते हैं कि अगली बार कुछ नया आइडिया लेकर कांवड़ लेकर आएंगे।
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