गज्जू बना और भंसालीजी ने मिलाया 'सुर':शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का 'रोडवेज-सफर'; मंत्री और कलेक्टर ने लगाई मेहंदी

गज्जू बना और भंसालीजी ने मिलाया 'सुर':शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का 'रोडवेज-सफर'; मंत्री और कलेक्टर ने लगाई मेहंदी




नमस्कार शिक्षामंत्रीजी ने पाली से कोटा तक रोडवेज बस में सफर करके ईंधन बचाने का संदेश दिया। डीग में गृह राज्यमंत्रीजी और कलेक्टर महोदय ने मिलकर पदयात्री के तलवों में मेहंदी लगाई। जयपुर में पीसीसी चीफ और सीनियर बीजेपी नेता ने एक-दूसरे पर वार-पलटवार किया। जोधपुर के बीजेपी ट्रेनिंग कैंप में मंत्रीजी और विधायकजी ने बॉलीवुड गीतों पर जुगलबंदी की। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. बस में शिक्षामंत्री मदन दिलावर सईद कादरी साहब ने खूबसूरत गीत लिखा। इसे जुबिन नौटियाल ने उतने ही सुरीले ढंग से गाया। जूनियर श्राफ की फिल्म बागी-2 में यह गीत था, जिसके बोल थे- लो सफर शुरू हो गया। इस वक्त यह सफर रोमांटिज्म वाला नहीं, बल्कि ईंधन बचाने के लिए ट्रेन, बस और ईवी का है। प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद सिलसिलेवार ढंग से यह सफर चल रहा है। इसी कड़ी में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पाली से कोटा तक रोडवेज बस में सफर किया। हालांकि विधायकों व मंत्रीगण को रोडवेज बसों में फ्री यात्रा का अधिकार मिलता है। किंतु मंत्रीजी ने विशाल हृदय दिखाते हुए टिकट खरीदकर कंडक्टर और रोडवेज को भी निहाल किया। नेतागण जब भी आमजन की तरह सफर करते हैं तो आम जन को सूचना देने के लिए सफर को शूट करने के लिए कैमरामैन जरूर मौजूद रहते हैं। उनका मौजूद रहना लाजिमी भी है। क्योंकि किसी हस्ती का आम आदमी की तरह व्यवहार करना आम आदमी को यह हौसला देता है कि वह आम आदमी की तरह व्यवहार कर सके। तो आम आदमी तक संदेश पहुंचाने के लिए मंत्रीजी का बस में चढ़ना, विधायक सीट पर बैठे सज्जन को उठाकर मंत्रीजी को बैठाना, मंत्रीजी का टिकट लेना, मंत्रीजी का सफर करते हुए मोबाइल देखना, अन्य यात्रियों से संवाद करना और सकुशल मुकाम तक पहुंचना…सब कुछ तस्वीरों-दृश्यों में कैद किया गया। मंत्रीजी मुकाम पर पहुंचे तो खिड़की से जनता का अभिवादन किया। मंत्रीजी सीट से उठने ही वाले थे कि एक पत्रकार बंधु को याद आया कि उसका कैमरामैन अभी तक मौके पर नहीं पहुंचा है। उसने उठ रहे मंत्रीजी महोदय से वापस बैठने की गुहार लगाई। ताकि मंत्रीजी के रोडवेज वाले सफर को उनका कैमरामैन भी शूट कर सके और अपने सर्कुलर वाले आम जन तक तस्वीर-दृश्य पहुंचा सके। 2. मंत्रीजी और कलेक्टर साहब की ‘मेहंदी सेवा’ कुछ लोग सदियों से ईंधन बचा रहे हैं। इन्हें धार्मिक पदयात्री कहा जाता है। ये पैदल ही चलकर अब तक धर्म कमाते थे। ताजा जानकारी के अनुसार ये सदियों से ईंधन भी बचाते आ रहे हैं। ब्रज में चौरासी कोस की परिक्रमा का दौर चल रहा है। यात्रा सुगम रहे और यात्रियों को किसी तरह तरह की परेशानी न हो, इसका जायजा लेने गृह राज्यमंत्रीजी डीग के एक कैंप में पहुंच गए। जहां यात्रियों के लिए विश्राम स्थल बनाया गया था। कलेक्टर साहब भी मंत्रीजी के साथ थे। मंत्रीजी ने देखा कि एक युवक ने बाल्टी में मेहंदी कलर का गाढ़ा घोल भर रखा है। युवक थके-मांदे यात्रियों के पैरों पर उस घोल का लेप लगा रहा है। यह घोल सच में मेहंदी ही था। पता चला कि परिक्रमा लगाते यात्रियों के पांव छालों और आंटन (गांठ) से भर जाते हैं। मेहंदी लगाने से उन्हें राहत मिलती है। मंत्रीजी को इस भाव ने आनंदित किया। वे एक बुजुर्ग यात्री के पास बैठे और हाथ में मेहंदी का गाढ़ा घोल लेकर खुद भी यात्री के तलवों पर लगाने लगे। प्रशासन को चाहिए कि वह शासन को फॉलो करे। इसी नियम के आधार पर कलेक्टर महोदय भी वहीं मंत्रीजी के पास पालथी मारकर बैठ गए और बुजुर्ग के दूसरे पैर पर मेहंदी का लेप लगाने लगे। बुजुर्ग को आधे रास्ते में ही चौरासी कोस परिक्रमा का फल मिल गया। एक पैर मंत्रीजी लेकर बैठे हैं। दूसरा पैर कलेक्टर साहब लेकर बैठे हैं। मेहंदी सेवा हो रही है। इससे बढ़कर सुख क्या होगा। यात्रा धन्य हो गई। साथ ही साथ मंत्रीजी और कलेक्टर महोदय ने भी धर्म-लाभ कमा लिया। इस सुअवसर के लिए भी वहां हमेशा की तरह कैमरामैन मौजूद था, जिसने इस सेवा-भाव को आम जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया। 3. डोटासरा VS राठौड़ शेखावाटी के धुरंधरों में जब टकराव होता है तो जबरदस्त होता है। इन दिनों बीजेपी के सीनियर नेता राजेंद्र राठौड़ और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के बीच वाक-युद्ध चल रहा है। एक-दूसरे पर जमकर पलटवार किए जा रहे हैं। पक्ष-विपक्ष का काम भी यही है। एक-दूसरे की नाकामी उजागर करना। एक-दूसरे के गलत काम को सामने लाने का प्रयास करना। यह करने के लिए आमतौर पर आरोप लगाए जाते हैं। फिर आरोपों की सफाई में पलटकर आरोप लगाते हुए वार किया जाता है। इस तरह मुख्य मुद्दा गौण हो जाता है और शब्द बाण की गर्जना भर रह जाती है। शास्त्रों में इसी को राजनीति कहा जाता है। पत्रकार के सामने पीसीसी चीफ बैठे थे। विषय था- ‘बंगाल चुनाव में भाजपा की जीत के पीछे राजेंद्र राठौड़ की भूमिका’ विषय को ही डोटासराजी ने सिरे से नकारते हुए कहा- राजेंद्र राठौड़ क्या हैं? वे तो फरारी काट रहे हैं। फ्री हैं इसलिए इधर-उधर घूमते हैं। पार्टी काम देती है तो मन लगा रहता है। पत्रकार ने सवाल दूसरे ढंग से फिर दोहराया। कहा- बंगाल में मंच से कहा गया कि राजेंद्र राठौड़ और सात-आठ विधायकों ने बढ़िया काम किया। डोटासराजी ने जवाब में आरोपों की बौछार की- तो क्या राजेंद्र राठौड़ ने बंगाल में सरकार बना दी? सरकार तो वहां पैसे ने, ईडी ने, इनकम टैक्स ने, सीआरपीएफ ने, धन-बल ने, एसआईआर ने, चुनाव आयोग ने मिलकर बनाई है। इधर, डोटासराजी मानें या न मानें, लेकिन बंगाल चुनाव के बाद पार्टी में राठौड़ साहब की वकत बढ़ गई। पत्रकार ने राठौड़ जी से पेपरलीक से जुड़ा सवाल कर दिया। उन्होंने डोटासराजी पर पिट्‌ठू बैठाने का प्रयास किया। कहा- डोटासरा जी भूल गए जब पिछली सरकार के समय उनकी सरपरस्ती थी और किस प्रकार सीकर से गारंटेड बैच निकला करते थे। 4. चलते-चलते.. मशहूर विज्ञापनकार पीयूष पांडेजी ने एक राष्ट्रीय महत्व का गीत लिखा था। 1988 में इसे स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पहली बार प्रसारित किया गया था। यह गीत था- मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा। महान आत्मा पांडेजी पिछले वर्ष फानी जहान को अलविदा कह गए। लेकिन उनका लिखा यह गीत अमर हो गया। इस गीत का प्रयोग राजनीति में विविध भांति से आज भी किया जाता है। जोधपुर में पंडित दीनदयाल प्रशिक्षण महा अभियान के तहत जिला वर्ग की ट्रेनिंग चल रही थी। ट्रेनिंग में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और जोधपुर शहर विधायक अतुल भंसाली मौजूद थे। अन्य नेतागण, पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी शामिल थे। शक्तिशाली संगठन ही शक्तिशाली पार्टी का आधार होता है। संगठन को शक्तिशाली बनाए रखने के लिए जरूरी है कि सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का सुर मिले। अगर नेतागण-पदाधिकारी-कार्यकर्ता अपना-अपना राग अलापने लगेंगे तो संगठन कमजोर होगा। इसलिए जरूरी है कि ‘मिले सुर इनका और उनका, तो सुर बने सबका’ इसी नियम का पालन करते हुए केंद्रीय मंत्रीजी और विधायक महोदय ने माइक थामे और गीतकार राजेंद्र कृष्ण का लिखा मशहूर फिल्मी गीत गाया- पल-पल दिल के पास ‘तुम’ रहती हो। यहां ‘तुम’ से तात्पर्य पार्टी से है। इसके बाद दोनों नेताओं ने संतोष आनंद साहब की अमर रचना का गायन किया- जिंदगी की न टूटे लड़ी, प्यार कर ले घड़ी दो घड़ी। यहां भी जिंदगी का तात्पर्य पार्टी से है। अंत में सभी ने साहिर लुधियानवी साहब का लिखा गीत मिलकर गाया- ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का। यहां भी देश का तात्पर्य पार्टी से है। इनपुट सहयोग- मुकेश कुमार जांगिड़ (डीग), गौरव माथुर (भरतपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।



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