जनता पर दोहरी मार…:मेंटेनेंस के नाम पर रोज घंटों कटौती, 30 दिन में 267 बार एचटी फीडरों पर ट्रिपिंग
रोजाना घंटों तक 33 और 11 केवी के कई फीडरों से बिजली सप्लाई बंद रखकर मेंटेनेंस का दावा करने वाले अफसरों के दावे को ट्रिपिंग रिपोर्ट मुंह चिढ़ा रही है। बीते माह अप्रैल के 30 दिनों में देखें, तो 33 केवी के (एचटी) 35 फीडरों पर 267 बार ट्रिपिंग हुई है। यानी कि रोज औसतन 8-9 बार इस ट्रिपिंग के कारण लोगों को बिजली कटौती की मार झेलनी पड़ी है। यह रिपोर्ट अफसरों की नाकामी को दर्शा रही है कि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के शहर में सप्लाई सिस्टम किस कदर फेल हो रहा है। जबकि अप्रैल में सप्लाई सिस्टम पर अभी उतना लोड नहीं आया था जो मई-जून में पड़ने वाली गर्मी के दौरान आता है। अप्रैल 2025 और अप्रैल 2026 के ट्रिपिंग आंकड़ों से पता चलता है कि शहर में 21.36% ट्रिपिंग 33 केवी के फीडरों पर बढ़ी है। बीते वर्ष अप्रैल में 220 ट्रिपिंग थी। इस साल ये आंकड़ा 267 पर पहुंच गया। इस ट्रिपिंग से घरेलू, व्यवसायिक और औद्योगिक सभी सेक्टर पर असर पड़ा है। जिम्मेदार बहुत, तब भी बिगड़ती व्यवस्था विनोद कटारे, सीजीएम: ग्वालियर रीजन के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) कार्यालय ग्वालियर में है और यहां सीजीएम विनोद कटारे की पदस्थापना है। जिन्हें बिजली सप्लाई सिस्टम की लगातार मॉनिटरिंग करनी होती है। साथ ही सप्लाई सिस्टम में ब्रेक आने पर व दूसरी गड़बड़ियों को ऊर्जा मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में लाकर कार्यवाही करनी होती है। लेकिन अधीनस्थ अफसरों से सांठगांठ के कारण कटारे द्वारा ऐसा कुछ नहीं किया जाता।
संदीप कालरा, जीएम: शहरी क्षेत्र के महाप्रबंधक (जीएम) कालरा को फील्ड में उतरकर इस फेल्योर की जांच और संबंधित अधिकारियों पर कार्यवाही आगे बढ़ानी चाहिए। लेकिन वे ज्यादातर समय दफ्तर में बैठे-बैठे बैठकों में ही बिता रहे हैं और शहर में सप्लाई सिस्टम लगातार बिगड़ा हुआ है।
आरके मालवीय, डीजीएम: हाइटेंशन मेंटेनेंस डीजीएम के तौर पर पदस्थ राजकुमार मालवीय के जिम्मे हाइटेंशन सप्लाई सिस्टम का मेंटेनेंस है। जिनकी जिम्मेदारी है कि ये सिस्टम ब्रेक न हो पाए, इसके लिए लगातार मेंटेनेंस के दावे भी किए जाते हैं। फिर भी सप्लाई सिस्टम अप्रैल के दौरान एक-एक दिन में 8 से 9 बार ब्रेक हुआ है। मैं रिपोर्ट देखकर आगे बताता हूं ^अप्रैल के अंत में मौसम बदलता रहा, जिस कारण सप्लाई सिस्टम प्रभावित हुआ था। बाकी ऊर्जा मंत्री के क्षेत्र की बात करें, तो वहां आंधी का असर कम रहता है। इसलिए सिस्टम में दिक्कत नहीं आती। लेकिन मेरे हिसाब से अप्रैल में ट्रिपिंग कम हुई थी। मैं रिपोर्ट देखकर आगे बताता हूं। – राजकुमार मालवीय, डीजीएम/ एचटी मेंटेनेंस ऊर्जा मंत्री के क्षेत्र को बचाकर, रिपोर्ट छिपाना शुरू
बिजली कंपनी के अफसर अपनी नाकामी छिपाने के लिए एक नया काम और शुरू कर चुके हैं। पहले ट्रिपिंग की रिपोर्ट हर महीने कंपनी अफसरों के ऑफिशियल ग्रुपों में सार्वजनिक तौर पर दी जाती थी। ऐसी स्थिति में स्थानीय ऊर्जा मंत्री तक कई लोगों द्वारा इसका एनालिसिस दिया जाता और उसकी समीक्षा भी होती थी, लेकिन इस समीक्षा और खुद की नाकामी छिपाने के लिए मुख्य महाप्रबंधक, महाप्रबंधक और उप महाप्रबंधक ने इस रिपोर्ट को ऑफिशियल करना बंद करा दिया। साथ ही इस व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को हिदायत दे दी गई कि यदि रिपोर्ट बाहर गई, तो कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं, बड़ी चतुराई के साथ ये अफसर ऊर्जा मंत्री के क्षेत्र में ट्रिपिंग कम कर उन्हें खुश किए हुए हैं। जबकि पूरे शहर में ट्रिपिंग की मार बढ़ा दी गई है।
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