“धर्मस्थल को राजनीति का मंच बनाया जा रहा”:पूर्व मंत्री ने रविशंकर महाराज को लिखा पत्र, धाम में BJP के प्रशिक्षण शिविर पर उठाए सवाल

“धर्मस्थल को राजनीति का मंच बनाया जा रहा”:पूर्व मंत्री ने रविशंकर महाराज को लिखा पत्र, धाम में BJP के प्रशिक्षण शिविर पर उठाए सवाल




भिंड। रावतपुरा धाम में आयोजित भाजपा के दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर को लेकर सियासत गरमा गई है। मध्यप्रदेश के पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने रावतपुरा सरकार के प्रमुख रविशंकर महाराज को पत्र लिखकर धाम में राजनीतिक गतिविधियों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों की आस्था का केंद्र रहे रावतपुरा धाम को भाजपा की राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख मंच बनाया जा रहा है। “धाम को राजनीति से दूर रखने का किया था वादा” डॉ. गोविंद सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि “रावतपुरा धाम में भाजपा का दो दिवसीय प्रशिक्षण” यह खबर पढ़कर उन्हें दुख हुआ। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2013 में रविशंकर महाराज ने उनसे वादा किया था कि रावतपुरा धाम को राजनीति से दूर रखा जाएगा और केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित रखा जाएगा। लेकिन अब धाम में राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित होने से उस वचन का उल्लंघन हुआ है। पुराने दिनों का किया उल्लेख पूर्व मंत्री ने पत्र में रावतपुरा धाम के पुराने दिनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि वर्ष 1998 से 2003 के दौरान धाम देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र था, जहां दर्शन के लिए हजारों लोग घंटों इंतजार करते थे। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर आज आम भक्तों की आस्था क्यों कम हो रही है। रावतपुरा में बीजेपी का प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। वहीं, डॉ. गोविंद सिंह ने ट्रस्ट और संस्थाओं के संचालन को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के बजाय आर्थिक साम्राज्य खड़ा करने पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही सभी ट्रस्टियों और संस्थाओं की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की, ताकि श्रद्धालुओं के बीच दोबारा विश्वास कायम हो सके। मेडिकल कॉलेज से जुड़े प्रकरण का भी किया जिक्र पत्र में उन्होंने रावतपुरा मेडिकल कॉलेज रायपुर से जुड़े कथित रिश्वत प्रकरण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों द्वारा दर्ज एफआईआर में ट्रस्ट अध्यक्ष को भी आरोपी बनाया गया है। डॉ. गोविंद सिंह ने अंत में अपील की कि रावतपुरा धाम की प्रतिष्ठा और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था को पुनः स्थापित करने के लिए गंभीर प्रयास किए जाएं।



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