जोधपुर एम्स ने कैंसर मरीजों के लिए जगाई उम्मीद:सफलतापूर्वक किया बोन मैरो ट्रांसप्लांट, 23 साल की लड़की को मिला नया जीवन
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जोधपुर ने कैंसर मरीजों के लिए नई उम्मीद जगाई है। यहां डॉक्टरों की टीम ने पहला सफल एलोजीनिक बोन मैरों ट्रांसप्लांट (बीएमटी) कर इतिहास रच दिया। रक्त कैंसर (एएमएल) से जूझ रही 23 साल की लड़की को उसके छोटे भाई से बोन मैरों मिला। अब उसकी हालत में सुधार है और जल्द छुट्टी मिलने वाली है।
बता दें कि एलोजिनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट एक अत्यन्त जटिल और संवेदनशील प्रक्रिया है। जिसमें डोनर मैचिंग से लेकर इंफेक्शन कंट्रोल तक सब सटीक होना जरूरी होता है। एम्स के डॉ. प्रमोद कुमार (एसोसिएट प्रोफेसर, मेडिकल ऑन्कोलॉजी-हेमेटोलॉजी) की अगुवाई में डॉ. अर्जुन (असिस्टेंट प्रोफेसर), डॉ. अनुभव गुप्ता (ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन) और डॉ. अभिषेक पुरोहित (पैथोलॉजी) ने ये ट्रांसप्लांट कर दिखाया दिखाया। मरीज के भाई HLA मैच में परफेक्ट पाया गया। एम्स की इस सफलता से राजस्थान और आसपास के राज्यों के कैंसर मरीजों को स्थानीय स्तर पर एडवांस ट्रीटमेंट मिलेगा। बड़े शहरों के चक्कर लगाने की मजबूरी खत्म। एम्स जोधपुर अब उन्नत कैंसर केयर का हब बनेगा।
एम्स के कार्यकारी निदेशक प्रो. जी.डी. पुरी ने बताया कि पिछले एक साल में 7 बोन मैरों ट्रांसप्लांट, 100 किडनी और 26 लिवर ट्रांसप्लांट हो चुके हैं। मरीजों की बढ़ती डिमांड को देखते हुए समर्पित ‘ट्रांसप्लांट सेंटर’ बनाने की योजना है। इससे इलाज सस्ता और आसान होगा। एम्स हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉक्टर अभिषेक भारद्वाज ने भी चिकित्सकों की इस उपलब्धि की सराहना की।
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