पिता बोला- बेटी ने नाक कटाई, उसे मार डाला:प्रेम संबंधों से नाराज होकर गला घोंटा, बेटों के साथ मिलकर शव खेत में जलाया

पिता बोला- बेटी ने नाक कटाई, उसे मार डाला:प्रेम संबंधों से नाराज होकर गला घोंटा, बेटों के साथ मिलकर शव खेत में जलाया




मैंने अपनी बेटी को इसलिए मार डाला, क्योंकि वो मेरी निगाह से बाहर हो गई थी। उसे बेटे की तरह रखा लेकिन उसने नाक कटवा दी। मेरी बात पर नहीं रही, तो वह बेटी थी या दुश्मन? यह बयान किशन गुर्जर (70) ने पुलिस के सामने दिया है। उसने बताया कि 8 मई 2026 को अपनी बेटी जूली गुर्जर (33) को फंदे पर लटका दिया था। इसके बाद बेटों रामसेवक (50) और दीपू (35) के साथ मिलकर शव को खेत में ले जाकर जला दिया। वारदात के 26 दिन बाद जब राज खुला, तब 3 जून को पुलिस ने किशन, रामसेवक और दीपू गुर्जर को हिरासत में ले लिया। उनकी आधिकारिक गिरफ्तारी घोषित नहीं की गई है। घटनास्थल पर मिली हडि्डयों को जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद हत्या का केस दर्ज किया जाएगा। तब तक तीनों थाने के लॉकअप में ही रहेंगे। मामला डबरा थाना क्षेत्र के लखिया गांव का है। इस पेचीदा केस को समझने के लिए दैनिक भास्कर ने ग्वालियर एसपी धर्मवीर यादव से बात की। जानने की कोशिश की कि आरोपियों ने क्यों और कैसे वारदात को अंजाम दिया? पहले बेटी का गला दबाया, फिर फंदे पर लटकाया किशन गुर्जर ने पुलिस को बताया कि गांव के बाहर खेत के पास घर बना है। 8 मई की रात करीब 10 बजे बेटी जूली गुर्जर से विवाद हुआ। झगड़ा बढ़ने पर गुस्से में बेटी का गला दबा दिया। वह बेसुध होकर गिर पड़ी। इसके बाद फंदा बनाकर फांसी पर लटका दिया। थोड़ी देर बाद शव को ठिकाने लगाने रामसेवक और दीपक गुर्जर को बुलाया। रात करीब 12 बजे शव को ट्रैक्टर में डालकर तीनों एक किलोमीटर दूर नहर किनारे बने खेत पर पहुंचे। यहां शव को जला दिया। करीब दो घंटे तक चिता ठंडी होने का इंतजार करते रहे। इसके बाद आग पर मिट्‌टी डालकर ठंडा किया। बची हडि्डयों और अवशेषों को खेत में ही इधर-उधर फेंक दिया। कुछ को जमीन में गाड़ दिया। सुबह करीब 4 बजे घर आकर तीनों सो गए। शांति के लिए पूजा कराई, कन्याभोज भी दिया किशन पेशे से किसान है। परिवार का समाज में प्रभाव है। उसने बताया कि घर आकर आत्मा की शांति के लिए गुपचुप तरीके से पूजा-पाठ किया। 12 दिन बाद कन्याभोज भी कराया। दिन बीत रहे थे, लेकिन हर पल डर रहता था कि राज उजागर न हो जाए। रिश्तेदार जूली के बारे में पूछते थे, तो गोलमोल जवाब देना पड़ता था। सोचते थे कि आखिर कब तक छुपाएंगे। तीनों घर पर तो दहशत में रहते थे लेकिन लोगों को दिखाने के लिए सामान्य दिनों की तरह घूमना-फिरना कर रहे थे। सख्ती करने पर कबूला हत्या का जुर्म करीब 20 दिन तक जब जूली नहीं दिखी, तो गांव में कानाफूसी शुरू हो गई। लोगों को शक हुआ कि गुस्सैल प्रवृत्ति के किशन ने उसकी हत्या तो नहीं कर दी? गांव की चर्चा पुलिस तक भी पहुंच गई। 3 जून को एडिशनल एसपी देहात जयराज कुबेर, डबरा देहात थाना प्रभारी आईपीएस मनोज कुमार, एसडीओपी सौरभ कुमार, सिटी थाना प्रभारी संजय शर्मा गांव पहुंचे। किशन गुर्जर समेत दोनों बेटों को टेकनपुर चौकी ले आए। यहां तीनों से बारी-बारी जूली के बारे में पूछताछ की। सख्ती करने पर किशन ने पूरी कहानी बता दी। गांव के ही लड़के से थे बेटी के संबंध किशन ने पुलिस को बताया कि गांव के ही एक लड़के से बेटी के प्रेम संबंध हो गए थे। 5 मई को वह घर से लापता हो गई। देहात थाने में गुमशुदगी भी दर्ज कराई थी। 7 मई को मुरैना के चखौटी गांव से उसे बरामद किया गया। इसके बाद किशन लगातार बेटी को समझाता रहा कि वह लड़के से प्रेम संबंध खत्म कर ले। समाज में लोग तरह-तरह की बातें बना रहे हैं लेकिन वह मानने को तैयार नहीं थी। उसे लगने लगा कि जूली ने उसकी नाक कटवा दी। समाज में मुंह काला कर दिया। 7 मई को पूरी रात सो नहीं पाया। बेटी की हत्या करने का मन बना लिया। पति से तलाक हुआ, एक बेटा है जूली की शादी 10 मई 2010 को डबरा के भैंसनारी गांव में रहने वाले रंजीत गुर्जर से हुई थी। दोनों को एक बेटा भी है। पति-पत्नी के बीच किसी न किसी बात पर विवाद होता रहता था। तीन साल पहले जूली मायके लखिया आकर रहने लगी थी। रंजीत ने भितरवार थाना और एसपी कार्यालय में आवेदन दिए थे। बाद में तलाक के लिए केस भी लगा दिया था। रंजीत का कहना है कि जब से वह गई है, हमारा उससे लेना-देना नहीं था। हमें तो अखबारों के माध्यम से उसकी मौत की जानकारी लगी है। लैब रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई एसपी धर्मवीर सिंह ने कहा- पुलिस के पास फिलहाल पुख्ता सबूत नहीं हैं, जिसके आधार पर इसे हत्या करार दिया जाए। आरोपियों का कबूलनामा तो है लेकिन खेत में मिले हड्डियों के अवशेष की लैब रिपोर्ट आना बाकी है। रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि हड्डियां जूली की हैं या किसी जानवर की। रिपोर्ट में इंसानी हड्डियों की बात आती है तो डीएनए जांच कराई जाएगी, जिससे स्पष्ट होगा कि ये जूली की ही हैं। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। सीनियर क्रिमिनल लॉयर बृजेश पांडे का कहना है कि केस डीएनए रिपोर्ट पर निर्भर है। जब तक अवशेषों का डीएनए टेस्ट पॉजिटिव नहीं आ जाता, तब तक केस में कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता।



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