16 पद स्वीकृत, लेकिन सिर्फ 5 कर्मचारियों के भरोसे KVK:किसानों तक नई जानकारी पहुंचाने वाले केंद्र में स्टाफ की भारी कमी, बढ़ रही कामकाज की चुनौतियां

16 पद स्वीकृत, लेकिन सिर्फ 5 कर्मचारियों के भरोसे KVK:किसानों तक नई जानकारी पहुंचाने वाले केंद्र में स्टाफ की भारी कमी, बढ़ रही कामकाज की चुनौतियां




चित्तौड़गढ़ का कृषि विज्ञान केंद्र जिले के किसानों को नई खेती की तकनीक, उन्नत बीज, फसलों की देखभाल और आधुनिक कृषि तरीकों की जानकारी देने का काम करता है। लेकिन किसानों के लिए जरूरी यह संस्थान इन दिनों स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। केंद्र में कुल 16 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 5 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। इनमें भी ड्राइवर और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। यानी जिस केंद्र पर हजारों किसानों को मार्गदर्शन देने की जिम्मेदारी है, वहां अधिकांश पद खाली पड़े हैं। इसके बावजूद जो कर्मचारी मौजूद हैं, वे लगातार किसानों तक सेवाएं पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। एक वैज्ञानिक संभाल रहा पूरे केंद्र की जिम्मेदारी कृषि विज्ञान केंद्र में 6 वैज्ञानिकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन फिलहाल सिर्फ एक वैज्ञानिक ही कार्यरत है। वही सीनियर साइंटिस्ट होने के साथ-साथ केंद्र प्रमुख की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। तीन टेक्निकल असिस्टेंट के पदों में से भी सिर्फ एक कर्मचारी मौजूद है और उसे अकाउंट्स का काम भी देखना पड़ रहा है। उनको भी डेप्युटेशन पर लगा रखा है। दोनों सेक्शन ऑफिसर के पद खाली हैं। स्टेनोग्राफर डेप्युटेशन पर है। दो ड्राइवरों में एक और दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में भी सिर्फ एक कर्मचारी ही कार्यरत है। ऐसे में कई काम एक ही व्यक्ति को संभालने पड़ रहे हैं। इससे काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। रोज पहुंचते हैं सैकड़ों किसान कृषि विज्ञान केंद्र में हर दिन करीब 200 से 250 किसान जानकारी लेने पहुंचते हैं। वहीं जब ट्रेनिंग प्रोग्राम होते हैं तो यह संख्या 400 से 450 तक पहुंच जाती है। किसानों को खेती की नई तकनीक, रोग और कीट नियंत्रण, नई फसल किस्मों और उत्पादन बढ़ाने के तरीकों की जानकारी दी जाती है। हर महीने 5 से 6 ट्रेनिंग प्रोग्राम भी आयोजित किए जाते हैं। इतने बड़े स्तर पर काम होने के बावजूद स्टाफ की कमी लंबे समय से बनी हुई है। गांव-गांव जाकर देना पड़ रहा प्रशिक्षण इन दिनों “खेत बचाओ अभियान” के तहत कृषि विज्ञान केंद्र की टीम 22 दिनों तक लगातार गांवों में जाकर किसानों को ट्रेनिंग दे रही है। खेतों में डेमोंस्ट्रेशन लगाए जा रहे हैं और किसानों को मौके पर जानकारी दी जा रही है। लेकिन कम कर्मचारियों के कारण यह काम और चुनौतीपूर्ण हो गया है। कई बार एक ही कर्मचारी को एक साथ कई जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। रिक्त पद भरने की जरूरत कृषि विज्ञान केंद्र किसानों और वैज्ञानिक खेती के बीच एक जरूरी कड़ी है। जिले में खेती से जुड़े काम लगातार बढ़ रहे हैं और किसानों को नई तकनीकों की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसे में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरना जरूरी हो गया है। इससे किसानों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी और कर्मचारियों पर बढ़ रहा अतिरिक्त बोझ भी कम होगा। अभी केंद्र के कर्मचारी सीमित संसाधनों में काम संभाल रहे हैं, लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए स्टाफ बढ़ाना जरूरी नजर आता है।



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