बड़वानी के ग्राम करी में जंगली सूअरों का आतंक:किसानों की लाखों की मक्के की फसल बर्बाद; वन विभाग पर अनदेखी का आरोप
बड़वानी के ग्राम करी में जंगली सूअरों के आतंक से किसान परेशान हैं। सूअरों के झुंड खेतों में खड़ी मक्का की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है। शनिवार देर रात जंगली सूअरों के झुंड खेतों में घुसकर फसलें बर्बाद कर रहे हैं। अधिकांश किसानों ने अपने मक्के के खेतों के चारों ओर तार फेंसिंग कर रखी है, लेकिन कुछ किसान रात में भी फसल की रखवाली करने को मजबूर हैं। हालांकि, इस क्षेत्र में तेंदुए दिखने की आशंका के कारण कई किसान रात में खेतों में जाने से डरते हैं। किसानों की खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद किसान दीपक गेहलोद ने बताया कि जंगली सूअरों के बढ़ते आतंक को लेकर कई बार वन विभाग को शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक विभागीय अमले ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया है। उनके अनुसार, सूअरों के कारण किसानों की खड़ी फसलें पूरी तरह तबाह हो रही हैं। परेशान किसानों ने सामूहिक रूप से सरकार और प्रशासन से खेतों की सुरक्षा के लिए ‘तार फेंसिंग (तारबंदी) अनुदान योजना’ लागू करने और फसल नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसान बोले- सूअर लगातार फसलों को नुकसान पहुंचा रहे ग्राम करी के किसान कैलाश मुकाती ने बताया कि पिछले दो साल से जंगली सूअर लगातार फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस कारण अब उनका खेत में मक्का लगाने का मन नहीं करता। उन्होंने यह भी बताया कि जंगली जानवरों से होने वाले फसल नुकसान को फसल बीमा के दायरे में नहीं लाया जाता है। कैलाश मुकाती के अनुसार, उन्होंने चार एकड़ खेत में स्वीट कॉर्न मक्का की फसल लगाई थी, जिस पर प्रति एकड़ 55 से 60 हजार रुपए का खर्च आया था। फसल कटाई के लिए तैयार थी और 10 से 12 दिन बाद भुट्टे तोड़े जाने वाले थे, तभी जंगली सूअरों ने दो एकड़ से अधिक की फसल को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। सूअरों ने फसल को खाने के साथ ही उखाड़ फेंका सूअरों ने फसल को खाने के साथ ही उखाड़ फेंका। पिछले साल भी केले के पौधों को नुकसान पहुंचाया था। इस बार मक्का फसल फसल को भी नुकसान हुआ है। करीब एक से डेढ़ लाख की फसल बर्बाद हुई है। परेशान किसानों ने सामूहिक रूप से सरकार और प्रशासन से खेतों की सुरक्षा के लिए ‘तार फेंसिंग (तारबंदी) अनुदान योजना’ लागू करने और फसल नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसान राधेश्याम गेहलोद ने बताया कि उनके तीन एकड़ खेत में लौकी की फसल को जंगली सूअरों द्वारा नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने बताया कि पर एकड़ 50 से 60 हजार रुपए एकड़ का खर्च आया लगा है। आसपास के अन्य किसानों को भी भारी नुकसान हो रहा है।
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