बुझ गए दो घरों के चिराग, एक साथ उठी अर्थियां:झज्जर के भदानी गांव में नहीं चढ़ा चूल्हा,तीन दोस्तों ने देखा था सेना में भर्ती होकर देश सेवा का सपना

बुझ गए दो घरों के चिराग, एक साथ उठी अर्थियां:झज्जर के भदानी गांव में नहीं चढ़ा चूल्हा,तीन दोस्तों ने देखा था सेना में भर्ती होकर देश सेवा का सपना




झज्जर भदानी गांव के लिए शनिवार का दिन ऐसा दर्द दे गया, जिसे शायद यह गांव कभी भुला नहीं पाएगा। झज्जर-बहादुरगढ़ रोड पर हुए भीषण सड़क हादसे में गांव के 17 वर्षीय निशांत और 18 वर्षीय मुकुल की मौत हो गई, जबकि उनका दोस्त दीपक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे की खबर गांव में पहुंचते ही मातम पसर गया। हालात ऐसे रहे कि कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। जिस गांव की गलियों और खेतों में तीनों दोस्त कभी साथ दौड़ते, एक्सरसाइज करते और सेना में भर्ती होने के सपने देखते थे, उन्हीं गलियों में अब उनके बिछड़ने का दर्द है और हर आंख नम है। तीनों दोस्तों का सपना था सेना में भर्ती होकर देश सेवा करना निशांत, मुकुल और दीपक सिर्फ दोस्त नहीं थे, बल्कि बचपन से एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी थे। तीनों की स्कूल लाइफ भी साथ गुजरी। गांव के लोग अक्सर उन्हें खेतों और गलियों में साथ-साथ दौड़ते और एक्सरसाइज करते देखते थे। तीनों ने मिलकर सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने का सपना देखा था। मेहनत भी साथ थी और मंजिल भी एक। दीपक ने सबसे पहले सेना में भर्ती होकर अपने दोनों दोस्तों को आगे बढ़ने की राह दिखाई थी। इसके बाद निशांत और मुकुल भी उसी सपने को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे थे। गांव के लोगों को उम्मीद थी कि तीनों दोस्त एक दिन वर्दी पहनकर देश की सेवा करते नजर आएंगे। लेकिन किसी को क्या पता था कि एक सड़क हादसा तीनों दोस्तों की जिंदगी की कहानी ही बदल देगा। हादसे ने निशांत और मुकुल को हमेशा के लिए उनसे छीन लिया, जबकि उनका तीसरा साथी दीपक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। कोचिंग और फार्म अप्लाई करने निकले थे, रास्ते में काल बनकर आया हादसा बताया जा रहा है कि तीनों दोस्त कोचिंग लेने और फार्म अप्लाई करने के सिलसिले में झज्जर गए थे। घर से निकलते समय परिवारों ने भी नहीं सोचा होगा कि यह उनके बच्चों की आखिरी यात्रा साबित होगी। तेज रफ्तार पिकअप की भीषण टक्कर ने दो परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। जिस उम्र में निशांत और मुकुल अपने भविष्य की नींव रख रहे थे, उस उम्र में सड़क हादसे ने उनके सपनों को हमेशा के लिए रोक दिया। 4 तारीख को एयरफोर्स में होनी थी दीपक की ज्वाइनिंग, अब अस्पताल में जिंदगी की जंग हादसे में घायल दीपक के परिवार का दर्द भी किसी से कम नहीं है। दीपक की 4 अगस्त को एयरफोर्स में क्लर्क के पद पर ज्वाइनिंग होनी थी। परिवार बेटे के नए सफर की शुरुआत का इंतजार कर रहा था। घर में खुशियां आने वाली थीं, लेकिन उससे पहले ही हादसे ने सब कुछ बदल दिया। दुर्घटना में दीपक के हाथ व सिर में भी गंभीर चोट लगी है। हादसे के दौरान शीशे लगने से उसे गंभीर चोटें आईं और उसका उपचार चल रहा है। अब परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता बेटे की जिंदगी और उसके जल्द स्वस्थ होने की है।परिवार को उम्मीद है कि दीपक की गंभीर स्थिति को देखते हुए संबंधित विभाग उसे स्वास्थ्य लाभ के लिए कुछ अतिरिक्त समय और मानवीय आधार पर राहत देगा, ताकि वह पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर सके। हालांकि डॉक्टर कहना कि दीपक 4 अगस्त तक फिट हो जाएगा। वही सब लोग दुआ कर रहे हैं कि दीपक जल्दी स्वस्थ होकर सेना में भर्ती हो और अपने दोस्तों का सपना पूरा करें। मुकुल की मेरिट लिस्ट का था इंतजार, लेकिन जिंदगी ने बीच रास्ते में छोड़ दिया साथ 18 वर्षीय मुकुल भी अपने भविष्य को लेकर बेहद उत्साहित था। उसका टेस्ट हो चुका था और वह मेरिट लिस्ट आने का इंतजार कर रहा था। परिवार और गांव के लोगों को उम्मीद थी कि मुकुल भी जल्द अपने सपनों की ओर एक और कदम बढ़ाएगा। लेकिन जिस भविष्य का इंतजार पूरा परिवार कर रहा था, वह भविष्य आने से पहले ही हादसे ने मुकुल को उनसे छीन लिया। देर शाम उठीं दोनों अर्थियां, एक साथ जलीं दो चिताएं तो पूरा गांव रो पड़ा शनिवार को देर शाम जब निशांत और मुकुल की अर्थियां एक साथ उठीं, तो भदानी गांव की आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। एक तरफ दो घरों के चिराग बुझ चुके थे, तो दूसरी तरफ गांव का हर व्यक्ति अपने इन होनहार बच्चों को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ पड़ा। जिन दो दोस्तों को गांव ने हमेशा साथ खेलते, पढ़ते और भविष्य के सपने देखते देखा था, उन्हें एक साथ अंतिम विदाई देते समय हर किसी की आंखें नम थीं। श्मशान घाट पर जब दोनों दोस्तों की चिताएं एक साथ जलीं, तो माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। परिजनों की चीख-पुकार और दोस्तों की नम आंखों ने हर किसी का कलेजा चीर दिया। कुछ ही देर में आग की लपटों में दो परिवारों के सपने भी राख हो गए। एक तरफ निशांत और मुकुल को अंतिम विदाई दी जा रही थी, वहीं उनका तीसरा दोस्त दीपक अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा था। तीनों ने साथ मिलकर सेना में भर्ती होने का सपना देखा था। दीपक ने उस सपने की ओर पहला कदम बढ़ा भी दिया था, लेकिन अब उसके दोनों दोस्त इस दुनिया में नहीं हैं। जिन तीन दोस्तों के कदम कभी सेना की वर्दी की ओर बढ़ रहे थे, उनमें से दो आज पंचतत्व में विलीन हो गए और तीसरा अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी की जंग लड़ रहा है। हादसे ने दो घरों के चिराग बुझा दिए, लेकिन भदानी गांव की आंखों में इन दोनों युवाओं की यादें हमेशा जिंदा रहेंगी।



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