मानसून से पहले फरीदाबाद में 138 किलोमीटर नालों की सफाई:मेयर बोली- जलभराव से राहत की तैयारी , बारिश से पहले ड्रेनेज सिस्टम होगा दुरुस्त

मानसून से पहले फरीदाबाद में 138 किलोमीटर नालों की सफाई:मेयर बोली- जलभराव से राहत की तैयारी , बारिश से पहले ड्रेनेज सिस्टम होगा दुरुस्त




मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से निपटने के लिए फरीदाबाद नगर निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। नगर निगम की मेयर प्रवीण बत्रा जोशी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बारिश शुरू होने से पहले शहर के सभी प्रमुख नालों और जल निकासी तंत्र की पूरी तरह सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि बरसात के दौरान लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। मेयर ने बताया कि नगर निगम का लक्ष्य है कि मानसून आने से पहले पानी निकासी के लिए बने सभी नालों से गाद, कचरा और अन्य अवरोध हटाकर उन्हें पूरी क्षमता के साथ संचालित किया जाए। इसके लिए निगम और एफएमडीए की टीमें संयुक्त रूप से कार्य कर रही हैं। शहर में 37 बड़े और छोटे नाले फरीदाबाद में वर्तमान में 37 बड़े और छोटे नाले मौजूद हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 138 किलोमीटर है। इनमें से करीब 40 से 45 किलोमीटर लंबे प्रमुख खुले नालों की नियमित सफाई और डी-सिल्टिंग का कार्य नगर निगम और फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) द्वारा किया जाता है। इसके अलावा शहर में जल निकासी के लिए लगभग 850 किलोमीटर लंबा सेकेंडरी और टर्शियरी स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज नेटवर्क भी मौजूद है। इसमें छोटी नालियां और जल निकासी लाइनें शामिल हैं, जो शहर की करीब 74 प्रतिशत सड़कों को कवर करती हैं। निगम का दावा है कि इस नेटवर्क की सफाई और मरम्मत पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि बारिश का पानी तेजी से निकाला जा सके। शहर में पानी निकासी के मुख्य नाले शहर के प्रमुख नालों में गौंची मेन ड्रेन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसकी लंबाई करीब 70 किलोमीटर है। इसके अलावा गौंची ड्रेन का शहरी हिस्सा लगभग 5 किलोमीटर लंबा है। वहीं बुरिया नाला सिस्टम, उजीना डाइवर्जन ड्रेन, गुरुग्राम कैनाल से जुड़ा पूर्वी-पश्चिमी जल निकासी तंत्र और नीलम-बीके रोड के समानांतर बने प्रमुख ओपन ड्रेन भी शहर की जल निकासी व्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं। मेयर प्रवीण बत्रा जोशी ने कहा कि शहरवासियों को जलभराव से राहत दिलाना निगम की प्राथमिकता है और इसके लिए सभी संबंधित विभागों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। मानसून से पहले सफाई अभियान पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि बारिश के दौरान जल निकासी व्यवस्था सुचारू रूप से काम कर सके।



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