सब्जी विक्रेता की बेटी को पंजाब में छठा स्थान:PSEB 12वीं में सिमरन तिवारी ने रचा इतिहास; कार्डियोलॉजिस्ट बनकर सेवा करना सपना
लुधियाना कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत और मेहनत सच्ची हो तो गरीबी कभी भी कामयाबी के आड़े नहीं आती। इस बात को सच कर दिखाया है लुधियाना के शिमलापुरी इलाके की रहने वाली तेजा सिंह स्वतंत्र मेमोरियल स्कूल की सिमरन तिवारी ने। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) द्वारा घोषित 12वीं के नतीजों में अपनी सफलता का परचम लहराते हुए 500 में से 497 अंक प्राप्त किए हैं। सिमरन ने लुधियाना जिले में तीसरा और पूरे पंजाब में छठा स्थान हासिल कर अपने माता-पिता और शहर का नाम रोशन किया है। रात 9 से 2 बजे तक की कड़ी मेहनत सिमरन की यह सफलता किसी चमत्कार से कम नहीं है बल्कि यह उनके अटूट अनुशासन का परिणाम है। सिमरन ने बताया कि उनकी दिनचर्या बेहद सधी हुई थी। वह रोजाना रात 9 बजे से तड़के 2 बजे तक जी-तोड़ मेहनत करती थीं।और रात को पढ़ती थीं । टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल: उन्होंने बताया कि मोबाइल का इस्तेमाल केवल पढ़ाई के लिए ही किया। जब भी क्लास में कोई कठिन न्यूमेरिकल या कॉन्सेप्ट समझ नहीं आता था, तो वह ChatGPT जैसी आधुनिक तकनीक का सहारा लेती थीं। खेलों में भी आगे: सिमरन केवल पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि खेल के मैदान में भी सक्रिय हैं। वह 10वीं कक्षा से ही बेसबॉल और सॉफ्टबॉल की खिलाड़ी रही हैं,जिसने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा। पिता लगाते हैं सब्जी की फड़ी, माता-पिता हैं 5वीं पास सिमरन का पारिवारिक बैकग्राउंड साधारण और संघर्षपूर्ण है। उनके पिता सब्जी मंडी में सब्जी की फड़ी (ठेला) लगाकर घर का गुजारा करते हैं। ताज्जुब की बात यह है कि सिमरन के माता-पिता दोनों केवल 5वीं कक्षा तक पढ़े हैं लेकिन उन्होंने अपनी बेटी की शिक्षा और उसके सपनों के बीच कभी आर्थिक तंगहाली को बाधा नहीं बनने दिया। सिमरन के 2 बड़े भाई भी कॉलेज में नॉन-मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं जबकि सिमरन ने मेडिकल स्ट्रीम चुनी थी।सिमरन तिवारी ने बताया की मेरे पिता दिन-रात मेहनत करते हैं ताकि हम पढ़ सकें। उनकी इसी मेहनत का कर्ज मैं एक सफल डॉक्टर बनकर उतारना चाहती हूं। लक्ष्य: कार्डियोलॉजिस्ट बनकर समाज की सेवा करूंगी 10वीं में भी सिमरन ने लुधियाना जिले में तीसरा और पूरे पंजाब में छठा स्थान हासिल किया था शानदार प्रदर्शन करने वाली सिमरन के मन में 12वीं की परीक्षा को लेकर कोई डर नहीं था। उनका लक्ष्य बिल्कुल साफ है। सिमरन भविष्य में एक कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) बनना चाहती हैं। वह चाहती हैं कि डॉक्टर बनकर वह समाज के उन गरीब और जरूरतमंद लोगों की सेवा कर सकें जो महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा पाते। उनकी इस उपलब्धि पर उनके स्कूल के शिक्षकों ने भी खुशी जताई और कहा कि सिमरन जैसे छात्र समाज के लिए मिसाल हैं।
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