सोनीपत में पराली जलाने की होगी निगरानी:गांवों मे नोडल अधिकारियों की तैनाती, मोबाइल ऐप के जरिए दर्ज होगी पूरी रिपोर्ट
हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने धान सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी उपायुक्तों के साथ बैठक की। इस बैठक का मकसद किसानों को फसल के बचे हुए हिस्से को सही से इस्तेमाल करने के लिए जागरूक करना भी था। बैठक में पिछले साल हुई पराली जलाने की घटनाओं और दर्ज एफआईआर की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने इस बार आगजनी की घटनाओं पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए जरूरी निर्देश दिए। सभी गांवों में तैनात किए गए नोडल अधिकारी : उपायुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान सोनीपत उपायुक्त नेहा सिंह ने बताया कि जिले के सभी गांवों में नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांव स्तर पर बनाई जाने वाली टीमों में ग्राम सचिव और पटवारी को भी शामिल किया जाए। इससे पराली जलाने की घटनाओं की ठीक से निगरानी हो सकेगी और सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई हो सकेगी। उपायुक्त ने यह भी बताया कि आगजनी की घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए विभाग ने एक मोबाइल ऐप बनाया है। सभी नोडल अधिकारी इस ऐप के जरिए आगजनी की घटनाओं की फोटो और पूरी रिपोर्ट दर्ज करेंगे। इससे घटनाओं की निगरानी और मौके पर कार्रवाई की प्रक्रिया को और बेहतर बनाया जा सकेगा। किसानों को पराली प्रबंधन के लिए किया जाए जागरूक उपायुक्त नेहा सिंह ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को पराली नहीं जलाने तथा उसके उचित प्रबंधन के लिए जागरूक करें। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा धान के अवशेषों को जलाने के बजाय कृषि यंत्रों की सहायता से मिट्टी में मिलाकर प्रबंधन करने पर 1200 रुपए प्रति एकड़ की अनुदान राशि दी जाती है। उन्होंने कहा कि जो किसान पराली प्रबंधन के लिए कृषि विभाग को आवेदन करेंगे, उन्हें उपलब्धता के अनुसार आवश्यक कृषि यंत्र उपलब्ध करवाए जाएंगे। किसानों को पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान के बारे में भी जागरूक किया जाए। पिछले वर्ष आगजनी वाले गांवों पर विशेष नजर उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन गांवों में पिछले वर्ष पराली जलाने की घटनाएं हुई थीं और एफआईआर दर्ज हुई थी, उन गांवों में विशेष निगरानी रखी जाए। संबंधित अधिकारी ऐसे गांवों में पहले से ही किसानों से संपर्क करें और उन्हें पराली प्रबंधन के उपलब्ध विकल्पों की जानकारी दें, ताकि दोबारा आगजनी की घटनाएं न हों। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे धान की पराली को जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन करें। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव आमजन के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ता है। इसलिए किसान पर्यावरण संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें। हरसेक की रिपोर्ट पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (हरसेक) से प्राप्त पराली जलाने एवं अन्य आगजनी से संबंधित रिपोर्ट पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और कृषि विभाग के अधिकारी तुरंत कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं में संलिप्त किसानों अथवा अन्य आगजनी की घटनाओं में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि पराली जलाने वाले किसानों पर निर्धारित जुर्माने की कार्रवाई के साथ-साथ मेरी फसल मेरा ब्यौरा में रेड एंट्री भी की जाए, ताकि पराली जलाने की प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। बैठक में डीडीपीओ मनीष मलिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से आरओ अजय सिंह, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग से सहायक कृषि अभियंता नवीन हुड्डा, एसएमएस राहुल सैनी, मनोज कुमार तथा जेई संदीप मौजूद रहे।
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