स्टूडेंट यौन उत्पीड़न में 3 असिस्टेंट प्रोफेसर बर्खास्त:हिमाचल सरकार ने पवन-अनिल व वीरेंद्र पर की कार्रवाई, जांच में सही मिले आरोप
हिमाचल सरकार ने यौन उत्पीड़न के आरोपों में आज (गुरुवार को) तीन सहायक प्रोफेसरों की सेवाएं (डिसमिस) समाप्त कर दीं। तीनों को अपने-अपने कॉलेजों में छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न का दोषी पाया गया है। इसके बाद, सेक्रेटरी एजुकेशन राकेश कंवर ने पवन कुमार, अनिल कुमार और वीरेंद्र शर्मा को बर्खास्त कर दिया। घटना के वक्त सहायक प्रोफेसर (डांस-कथक) पवन कुमार फाइन आर्ट कॉलेज चौड़ा मैदान शिमला, सहायक प्रोफेसर (रसायन विज्ञान) अनिल कुमार राजकीय महाविद्यालय नादौन और सहायक प्रोफेसर (गणित) वीरेंद्र शर्मा राजीव गांधी डिग्री कॉलेज चौड़ा मैदान शिमला में तैनात थे। पवन कुमार पर 7वें समेस्टर की छात्रा ने लगाए थे आरोप पवन कुमार पर 7वें सेमेस्टर की छात्रा ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे, जो कि विभागीय जांच में सही पाए गए। शिकायत के अनुसार, आरोपी कई महीनों से छात्रा को परेशान कर रहा था और जनवरी 2024 में उसे अपने घर ले जाकर गलत हरकत करने की कोशिश की। आरोपों में छात्राओं को घर बुलाना, छेड़छाड़ करना, बिना अनुमति कार्यक्रमों में ले जाना और पद का दुरुपयोग शामिल था। अनिल ने नादौन कॉलेज में लैब के अंदर छेड़छाड़ की दूसरा मामला- नादौन कॉलेज का है, जहां अनिल कुमार पर बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा ने छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे। छात्रा ने 14 नवंबर 2024 को शिकायत दी कि प्रैक्टिकल क्लास के दौरान लैब में आरोपी ने उसके साथ अनुचित तरीके से छेड़छाड़ की। जांच के दौरान पीड़िता के आरोपों को सही पाया गया। शिमला में दुष्कर्म के प्रयास का आरोप तीसरा मामला- शिमला के राजीव गांधी राजकीय डिग्री कॉलेज चौड़ा मैदान का है। यहां गणित के असिस्टेंट प्रोफेसर वीरेंद्र शर्मा पर बीएससी सेकेंड ईयर की छात्रा ने गंभीर आरोप लगाए। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने छात्रा को व्हाट्सऐप के जरिए परेशान किया और मिलने के लिए बुलाया। बाद में उसे कार में बैठाकर अपने घर ले गया, जहां जबरन शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की गई। इन तीनों के खिलाफ विभागीय जांच में आरोप सही पाए जाने पर यह डिसमिसल फ्रॉम सर्विस की कार्रवाई की गई। सरकार का रुख: जीरो टॉलरेंस सरकार ने अपने आदेशों में स्पष्ट कहा कि इस तरह के कृत्य न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि शिक्षक की गरिमा और जिम्मेदारी के खिलाफ भी हैं।
ऐसे मामलों से शिक्षा संस्थानों की साख और छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ता है।
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